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सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

राजीव दीक्षित द्वारा

स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

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कोला को भूरा रंग देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ई-150 जैसे डाई से शरीर में विटामिन बी-6 की कमी हो सकती है।

फिलहाल मैक्सिको में शीतल पेयों से होने वाले खतरों के प्रति सावधान करने के लिए प्रेस कांग्रेस से लेकर जगह-जगह कार्यशालाएं तक आयोजित की जा रही हैं। इन आयोजनों के मार्फत एक तरफ लोगों को पोषण संबंधी जरूरतों के बारे में जानकारी दी जा रही है, दूसरी तरफ इन कार्बोनेटेड शीतल पेयों के नुकसानों के प्रति लोगों को सावधान किया जा रहा है। शुभ संकेत यह है कि कोला विरोधी मुहिम को मैक्सिको के लोगों का जबरदस्त समर्थन मिलना शुरू हो गया है और वे कोला कंपनियों के विज्ञापनी भ्रमजाल से बाहर निकलने को कसमसाने लगे हैं।

मुश्किल हिन्दुस्तान की 'सांस्कृतिक बंदर' बनती जा रही पीढ़ी के लिए है। यह पीढ़ी तो आधुनिकता की बयार में बेरोक-टोक बही जा रही है। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ नवजवानों को 'कल्चर्ड' बनाने के लिए लाखों डॉलर विज्ञापनों पर पानी की तरह बहा रही हैं और नतीजे के तौर पर देश के नवजवानों पर कल्चर्ड होने की खुमारी भी कायदे से चढ़ने लगी है। अलबक्ता, आजादी बचाओ आंदोलन जैसे संगठन शीतल पेयों को कार्बोनेटेड जहरीला पानी, लहर पेप्सी को जहर पेप्सी और कोकाकोला को धोखा कोला की संज्ञा देकर लोगों को उनके खतरों से सावधान करने के लिए कमर कसे हुए हैं।

इस मुहिम का नतीजा कुछ तो हुआ है कि अब हिन्दुस्तान में भी तमाम लोग इन शीतल पेयों से तौबा करने का मन बनाने लगे हैं। इनमें ऐसे भी धनी टाइप के लोग शामिल हैं जिन्होंने अपने घरों में पेप्सी-कोक के कैन पर कैन बतौर स्टॉक जमा कर रखे हैं। मुश्किल ये है कि जब इन्हें अहसास हुआ है कि स्टैण्डर्ड बनाने के चक्कर में पेप्सी-कोक का एक घूँट भी हलक नीचे उतारना मूर्खता के अलावा और कुछ नहीं है तो ये लोग इन शीतल पेयों के जहर से अब दूर तो रहना चाहते हैं पर अपने घरों में स्टॉक के तौर पर जो जमा कर रखा है उसका क्या करें? फिलहाल, इनकी इच्छाशक्ति इतनी प्रबल नहीं हुई है कि पेप्सी-कोक के कैन पर कैन नालियों में उड़ेले सकें। तो ऐसे सभी लोगों के लिए आजादी बचाओ आन्दोलन की सलाह है कि जिनके पास पेप्सी या कोकाकोला जैसे शीतल पेयों का स्टॉक है वे इन्हें फेंकने के बजाय संडास की सफाई के काम में ले लें। है न जोरदार सलाह ! आन्दोलन का कहना है कि आखिर लोग अपने घरों में संडास की सफाई के लिए हाइड्रोकलोरिक एसिड का इस्तेमाल करते ही हैं। पेप्सी-कोक में भी फास्फोरिक एसिड और कार्बोलिक एसिड जैसी चीजें हैं। संडास की सफाई वाले एसिड और पेप्सी-कोक का पी.एच. मान भी तीन के आस-पास लगभग एक जैसा ही है। इस पी.एच मान की चीजों को आँतों में पहुंचाना निश्चित रूप से नुकसानदेह है। ऐसे में अगर आपने गलतीवश पेप्सी या कोकाकोला खरीद ही लिया है तो पैसे और सेहत के नुकसान से बचने के लिए इनसे संडास की सफाई कर लेना ही बेहतर उपाय है।

आन्दोलन के कार्यकर्ता कोई हवा में ये बातें नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बाकायदा प्रयोग करके देखा और पाया है कि पेप्सी और कोकाकोला जैसे शीतल पेयों से संडास की गन्दगी वैसे ही चमाचम साफ होती है जैसे कि दूसरे एसिड से। तो चलिए, आप भी अपने घर में पड़े

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