सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
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सौन्दर्य का नाश करता है नशा
नशा, या थोड़ा और व्यापक अर्थ में कहें तो 'व्यसन', मनुष्य के मन और शरीर दोनों को ही असुंदर बनाता है। नशेड़ी या व्यसनी व्यक्ति की मानसिक शक्तियाँ कमजोर पड़ जाती हैं, स्मरणशक्ति दुर्बल हो जाती है, संकल्प-क्षमता ढीली हो जाती है और विवेक कुंद हो जाता है। व्यसनी व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ परिवार व समाज की भी तबाही का कारण बनता है।
शराब, सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू, गुटखा आदि व्यसन के जितने भी रूप हैं, सारे के सारे ही शरीर को जर्जर बनाते हैं और स्थिति ऐसी हो जाती है कि असाध्य किसिम के तमाम रोग बिन बुलाए मेहमान की तरह आ धमकते हैं। यह प्रमाणित हो चुका है कि नशा करने वालों का सौन्दर्य धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है। वैज्ञानिक अनुसंधानों ने यह भी अच्छी तरह सिद्ध कर दिया है कि धूम्रपान करने वालों पर बुढ़ापा जल्दी झलकने लगता है। दरअसल धूम्रपान का धुआँ शरीर के अंदर जाकर कुछ ऐसी क्रियाओं को बढ़ावा देता है जिससे त्वचा ढीली और पतली होने लगती है। त्वचा में झुर्रियाँ भी पड़ने लगती हैं तथा कम उम्र में ही बुढ़ापे का शारीरिक झुकाव शुरू हो जाता है। लंदन के सेंट थामस नामक अस्पताल में 50 समान जोड़ों का अध्ययन करने पर मालूम हुआ कि धूम्रपान करने वालों की त्वचा धूम्रपान न करने वालों से 28 प्रतिशत पतली हो गई थी। यह एक सच्चाई है कि सिगरेट, सिगार आदि ज्यादा पीने वालों के चेहरों पर इतना स्पष्ट परिवर्तन आ जाता है कि सामान्य लोग भी दूर से देखकर ही अक्सर उनकी पहचान कर लेते हैं।
रोजमर्रा सिगरेट पीने वालों को फेफड़ों का कैंसर 90 प्रतिशत, अन्य प्रकार के कैंसर 80 प्रतिशत, ब्रोंकाइटिस 80 प्रतिशत, हृदय रोग 30 प्रतिशत और एम्फिसीमा 20 प्रतिशत तक होने की आशंका रहती है। इसके अलावा पायरिया, बहरापन, मोतियाबिंद, श्वासनलियों में सूजन, अल्सर, भाँति-भाँति के मुख व मसूड़ों के रोग, हड्डी का कैंसर, मूत्राशय का कैंसर, आँतों का कैंसर, श्वासनली का कैंसर, शुक्राणुओं की कमी, नपुंसकता, मानसिक विकार आदि भी होने की संभावना बनी रहती है। सिगरेट आदि के धुएँ में मौजूद कार्बन-मोनो-ऑक्साइड खून के ऑक्सीजन को अवशोषित करके मस्तिष्क में इसकी आपूर्ति बाधित कर देती है। इसका नतीजा यह होता है कि मनुष्य की सहनशक्ति व स्मरणशक्ति कम होने लगती है और नाना प्रकार के मानसिक विकार पैदा होने लगते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार धूम्रपान से आँखों के लेंस पर धुँधलापन छाने लगता है और मोतियाबिन्द की संभावना बढ़ जाती है। धूम्रपान के धुएँ में मौजूद हाइड्रोजन साइनाइड व अन्य हानिकारक रसायन श्वासनलिका को मोटी कर देते हैं, जिससे दमे की आशंका बढ़ जाती है। धूम्रपान से पेट में एसिड अधिक बनने लगता है, जिससे अल्सर की संभावना भी प्रबल हो जाती है। इसके अलावा धूम्रपान रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ाकर मधुमेह को भी आमंत्रण देता है। धूम्रपान का हृदय पर घातक असर होता है। सिगरेट के धुएँ की कार्बन-मोनो-ऑक्साइड गैस रक्त में हीमोग्लोबिन कम कर देती है तथा रक्त वाहिनियाँ की भीतरी सतह पर वसा का जमाव ज्यादा कर
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