सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
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देती है। इसके साथ ही निकोटीन हृदय की गति को अनावश्यक रूप से बढ़ाता है तथा यह कैटा कोलामीन की मात्रा भी बढ़ाता है जिसकी वजह से रक्त में वसा की मात्रा बढ़ने लगती है। इन सब वजहों से हृदयाघात, पैरालिसिस आदि बीमारियाँ बड़ी आसानी से धर दबोचती हैं।
अनुसंधानों से यह बहुत पहले साबित हो चुका है कि सिगरेट के धुएँ में पाया जाना वाला पायरिन फेफड़ के कैंसर का कारण बनता है। इसका धुआँ फेफड़े की कार्यप्रणाली को भी अव्यवस्थित कर देता है तथा धुएँ में मौजूद टार फेफड़ों में संक्रमण, फेफड़ों की कोशिकाओं में सूजन तथा श्वासावरोध उत्पन्न करता है। महिलाएं अगर धूम्रपान करती हैं तो अपने साथ-साथ अपनी आने वाली संतानों का भी भविष्य बिगाड़ती हैं। धूम्रपान से गर्भपात का भय तो रहता ही है, गर्भस्थ शिशु के रोगग्रस्त पैदा होने या उसके मरने का भी डर रहता है। स्तन कैंसर या स्तन के अन्य रोग, गर्भाशय कैंसर, मासिक धर्म की गड़बड़ी, चेहरे का लावण्य खत्म होने जैसी तमाम परेशानियाँ धूम्रपान की वजह से महिलाओं को झेलनी पड़ सकती हैं। शोधों से यह भी प्रमाणित हुआ है कि धूम्रपान करने वाली महिलाओं की मृत्युदर पुरुषों की तुलना में ज्यादा होती है। चूंकि माताओं के स्वास्थ्य पर उनकी आने वाली संतानों का भी स्वास्थ्य बहुत हद तक निर्भर होता है इसलिए महिलाओं को नशे से बचना कहीं ज्यादा जरूरी है। धूम्रपान इतना नुकसानदेह है फिर भी चिन्ताजनक बात यह है कि इसकी गिरफ्त में लोग फँसते ही जा रहे हैं। इस समय दुनिया की लगभग 110 करोड़ की विशाल आबादी धूम्रपान की शिकार है। इसमें से 80 करोड़ लोग विकासशील देशों के हैं और 30 करोड़ लोग विकसित देशों के। एशिया में 55.8 प्रतिशत पुरुष, 3.71 प्रतिशत महिलाएं तथा 33 प्रतिशत बच्चे धूम्रपान करते हैं। रिक्शा चालक और मजदूर किस्म के लोग तो 80 से 90 प्रतिशत तक धूम्रपान के शिकार हैं। स्थिति यह है कि ये सभी नशेड़ी मिलकर पूरे साल में लगभग 60000 करोड़ सिगरेट पी जाते हैं। भारत जैसे देशों के नशेबाज 55 करोड़ सिगरेट रोज अर्थात् लगभग 20000 करोड़ सिगरेट साल भर में पीते हैं। विकसित देशों में 41 प्रतिशत पुरुष तथा 21 प्रतिशत महिलाएं नियमित रूप से धूम्रपान करते हैं। विकासशील देशों में लगभग 50 प्रतिशत पुरुष और 8 प्रतिशत महिलाएं नियमित धूम्रपान के आदी हैं।
धूम्रपान तथा विभिन्न रूपों में तम्बाकू सेवन से पूरी दुनिया में हर साल लगभग 30 लाख लोग असमय मौत के मुँह में पहुँचते हैं। इसमें भी लगभग एक तिहाई संख्या तो सिर्फ विकासशील देशों के लोगों की ही होती है। भारत में कैंसर से 10 प्रतिशत, साँस की बीमारी से 70 प्रतिशत तथा दिल की बीमारी से 25 प्रतिशत मृत्यु का कारण धूम्रपान होता है। केन्द्रीय स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो के अनुसार हमारे यहाँ हर साल लगभग 2200 करोड़ रुपया तंबाकू जनित बीमारियों के इलाज पर खर्च हो जाता है। सांख्यिकी और नियोजन विभाग के एक अनुमान के अनुसार 1989-90 में तम्बाकू सेवन करने वालों द्वारा किया गया मासिक खर्च 5060 करोड़ रुपये था, जो 1991-92 में 7964 करोड़ रुपये तक जा पहुँचा। स्थिति यह है कि यदि प्रति सिगरेट एक पैसे भी दाम बढ़ा दिया जाय तो सिगरेट बनाने वाली कंपनी का सालाना मुनाफा 200 करोड़ रुपये अतिरिक्त हो जाएगा। अंदेशा यह है कि नाना रूपों में तम्बाकू सेवन के नतीजे के तौर पर सन् 2020 के बाद हर साल पूरी दुनिया में लगभग एक करोड़ लोग मरेंगे। सिगरेट को होंठों तक लाने से पहले अपने को
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