सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
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विवेकवान मानने वाले लोगों को एक बार यह जरूर सोच लेना चाहिए कि आदमी का फेफड़ा सिगरेट का धुआँ भरने के लिए नहीं बनाया गया है।
इसी तरह नशे के और रूपों के ख़तरे भी भयावह हैं। तम्बाकू युक्त गुटखा व पान-मसाला की वजह से संपूर्ण भारत में, खासतौर से उत्तरी भारत में तो 'औरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस' जैसी कष्टदायी बीमारी महामारी का ही रूप लेती जा रही है। इस बीमारी में धीरे-धीरे मुँह बंद होने लगता है। इसी तरह 'ल्यूकोप्लेकिया' का प्रकोप भी बढ़ रहा है। ये बीमारियाँ कैंसर की शुरुआती स्थिति भी साबित हो सकती हैं। गुटखा, पान-मसाला खाने वालों को याद रखना चाहिए कि इनमें मिलाए जाने वाले विभिन्न पदार्थ जैसे- सैक्रिन, रंग, मेन्थॉल, इत्र आदि स्वास्थ्य के लिए बेहद ख़तरनाक साबित हो सकते हैं। इनमें डाली जाने वाली खालिस सुपारी भी कम नुकसानदेह नहीं है। सुपारी की टैनिन प्रोटीन के पाचन में बाधा पहुँचाती है। सुपारी के ज्यादा सेवन से शरीर में विटामिन 'ए' की भी कमी हो जाती है। कथा को प्रायः लोग हानिरहित समझते हैं, पर इसमें भी टैनिन की काफी मात्रा होती है। जब से सिन्थेटिक कथा तैयार होने लगा है तब से स्थिति को और भी ख़तरनाक ही समझिए।
शराब के नशे का तो ख़ैर पूछिए मत। इसने स्वास्थ्य और सामाजिक मूल्यों, दोनों का जितना नुकसान किया है वह आसानी से वर्णन नहीं किया जा सकता। शराब के चलते उजड़े घरों के दास्तान आये दिन सुनने-पढ़ने को मिलते ही रहते हैं। अब तो सड़क दुर्घटनाओं का एक सबसे बड़ा कारण भी शराबखोरी ही बन चुका है। शराब कितनी ख़तरनाक है इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि सामान्य हालत में जो व्यक्ति मार-काट की बात सोच भी नहीं सकता वह शराब के नशे में आसानी से हत्या करने पर आमादा हो सकता है। शराब मस्तिष्क को इतने हद तक अनियंत्रित कर सकती है कि आदमी पागल हो जाए। वास्तव में शराब की वजह से पागलों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। पागलों के दवाखानों के सर्वेक्षण से यह चोंकाने वाला तथ्य सामने आया कि हर दस पागलों में से छः शराब की वजह से पागल हुए थे।
शराब पाचनतंत्र में गड़बड़ी तो पैदा ही करती है, यह स्नायुओं से लेकर यकृत और हृदय तक पर बहुत बुरा असर डालती है। नुकसानों का परीक्षण करने के लिए इसे भोजन में मिलाकर सियार, कुत्ता, कबूतर, उल्लू आदि पशु-पक्षियों को दिया गया तो वे अकाल ही मृत्यु के शिकार हो गए। मदिरा का मद पेड़-पौधों तक पर अपना ख़तरनाक असर छोड़ता है। परीक्षणों में यह पाया गया है कि अगर मदिरायुक्त पानी पौधों की जड़ों में डाला जाए तो उनमें फल नहीं लगेंगे और वे धीरे-धीरे सूख जाएंगे। शराब मनुष्य की जिन्दगी को भी कुछ इसी तरह नष्ट करती है।
शरीर के बाह्य सौन्दर्य पर भी शराब का प्रभाव आसानी से देखा जा सकता है। शराबी व्यक्ति की आँखों में धीरे-धीरे रक्त धँस आता है और वे रक्तितम दिखाई देने लगती हैं। अच्छी भली सुंदर आँखें भी शराब पीने से डरावनी लगने लगती हैं और उनका तेज समाप्त हो जाता है। ज्यादा शराब चेहरे को भी जल्दी ही बूढ़ों की कतार में खड़ा कर देती है। यह बात अलग है कि सम्यन् शराबी खान-पान में पोषकता का विशेष ध्यान रखकर शराब के दुष्प्रभावों पर परदा डालने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं हो जाता कि वे इसके दुष्परिणामों से भी पूरी तरह सुरक्षित हो जाते हैं।
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