भारतकोश
सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

राजीव दीक्षित द्वारा

स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 77, कुल 80 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 77

WWW.RAJIVDIXITJI.COM | AUDIO | VIDEO | ANDROID APP

खतरा मँडराने लगा है। नशेड़ियों की जमात न अपनी सुरक्षा कर सकती है, न राष्ट्रीय अस्मिता की। ज़रूरत अब व्यसन-मुक्ति के प्रति गंभीर होने की है। सरकारों से बहुत उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि उन्हें विभिन्न प्रकार के नशे के व्यवसाय से हज़ारों करोड़ रुपये सालाना राजस्व मिलता है। यही वजह है कि जनता को मूर्ख बनाने के लिए एक तरफ़ मद्य निषेध विभाग चलाया जाता है तो दूसरी ओर दारु की बिक्री बढ़ाने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जाते हैं। नशाबंदी के लिए तो जनता में ही जागरूकता लानी होगी और व्यापक जनांदोलन छेड़ना होगा। इसके अलावा और कोई सरल उपाय नज़र नहीं आता।

नशे के शिकार जो लोग इससे मुक्ति चाहते हैं उनके लिए यहाँ कुछ सुझाव अवश्य दिए जा सकते हैं। गुटखा या पान-मसाला खाने वालों की आदत कुछ ऐसी हो जाती है कि वे अक्सर मुँह में कुछ रखकर चबाते रहना चाहते हैं। ऐसे लोगों को सौँफ़ चबाने की आदत डालनी चाहिए। सौँफ़ सुगंधित तो होती ही है, स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी होती है। यदि मन को मज़बूत करके गुटखा या पान-मसाला के स्थान पर 2-3 हफ़्ते तक भी सौँफ़ चबाएं तो गुटखे के व्यसन से आसानी से मुक्ति मिल सकती है। सौँफ़ के स्थान पर आँवले का भी प्रयोग किया जा सकता है। इसका तरीका यह है कि ताज़े हरे आँवलों को उबाल लें और गुठली निकालकर फेंक दें। अब उबले हुए आँवलों में पिंसी हुई काली मिर्च, काला नमक और सेंधा नमक स्वाद के अनुसार डालकर खूब मसलकर मिला लें और सुपारी के टुकड़े जैसे बनाकर धूप में सुखाकर सुरक्षित रख लें। गुटखा या पान-मसाला की जगह इन टुकड़ों को जब चाहें मुँह में रखकर चूसें, व्यसन धीरे-धीरे छूटने लगेगा।

सिगरेट पीने वालों के लिए वैज्ञानिक डॉ. एडवर्ड डोमिनो का सुझाव है कि यदि 50 ग्राम आलू, 85 ग्राम पके टमाटर का रस तथा 93 ग्राम पत्तागोभी का रस दिन में दो बार नियमपूर्वक सेवन किया जाय तो सिगरेट पीने की इच्छा नहीं होगी, क्योंकि इनमें 'निकोटीन' तत्त्व प्राकृतिक रूप में मौजूद रहता है। वास्तव में यदि आहार-विहार की शुद्धि के साथ योग, ध्यान आदि की विधियाँ नियमित रूप से अपनाई जाएँ तो नशे की जटिल परिस्थितियों पर भी आसानी से काबू पाया जा सकता है। निष्कर्ष के रूप में यही कहा जा सकता है कि यदि आप अपना स्वास्थ्य और सौन्दर्य बचाए रखना चाहते हैं तो नशे से दूर रहिए। यह भी याद रखिए कि नशे से दूर रहकर आप अपना ही नहीं बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र का भी भला करेंगे।

pg. 77