सेहत संजीवनी
Sehat Sanjivani
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)
सेहत संजीवनी
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- □ हैजे की अत्यंत लाभकारी दवा है।
- □ बिजौरा नींबू के 16 बीज 25 ग्राम पानी के साथ मिश्री सहित रोगी को पिलाएँ।
- □ 5 ग्राम पेठे के फूल पानी में पीसकर पीएँ।
( कुछ रोग, बवासीर... )
- □ डेढ़ किलो आँवला, 900 ग्राम हरड, 600 ग्राम धमासा, 250 ग्राम बिसाला, 250 ग्राम दशमूल, 1 किलो पोहकरमूल, 50 ग्राम बायबिडंग, 50 ग्राम मुलहठी, 50 ग्राम लोध, 50 ग्राम चवक, 50 ग्राम मजीठ, 350 ग्राम खैरसार, 500 ग्राम गुरुची, 1 किलो चीता 180 ग्राम बिजौरा, 50 ग्राम मेदा, 50 ग्राम महामेदा, 50 ग्राम जीवक, 50 ग्राम जीरा, 50 ग्राम पीपल, 50 ग्राम हल्दी, 50 ग्राम पित्तपापड़ा, 50 ग्राम अदरक, 50 ग्राम मेढ़ासिंगी, 50 ग्राम नागकेसर, 50 ग्राम जटामासी, 50 ग्राम इलायची, 50 ग्राम चिकनी, 50 ग्राम कंकोल, 50 ग्राम क्षीरकाकोली, 50 ग्राम वृद्धि, 50 ग्राम सतावरी, 50 ग्राम ऋद्धि, 50 ग्राम ऋषभक, 50 ग्राम कचूर, 50 ग्राम पद्याख, 50 ग्राम काबुली हरड, 50 ग्राम राखा, 50 ग्राम इन्द्रयव, 50 ग्राम नागरमोथा—सबको चौगुने पानी में डालकर आग पर रखें और काढ़ा तैयार कर लें। जब आधा पानी रह जाए तो उसमें डेढ़ किलो धौ के फूल, 250 तोले दाख, 200 ग्राम गुड़, डेढ़ किलो शहद मिलाकर घी के चिकने बर्तन में रखें। अब मिर्च और जटामासी का चूर्ण बनाकर धूप में रखें। फिर 100 ग्राम चन्दन, 100 ग्राम जायफल, 100 ग्राम दालचीनी, 100 ग्राम पीपल, 100 ग्राम बाला, 100 ग्राम लौंग, 100 ग्राम इलायची, 100 ग्राम नागकेसर, 100 ग्राम इलायची, 100 ग्राम
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साहिब बन्दगी
तमालपत्र, 100 ग्राम केसर, 12 ग्राम कस्तूरी-सबको घड़े में डालकर मुँह बंद करें और जमीन में गाढ़ दें। 16 दिन के बाद निकालकर खाएँ।
- □ 17 तरह के कुछ रोग को दूर करता है।
- □ पांडुरोग का नाश करता है।
- □ पेट के रोगों को समाप्त करता है।
- □ बवासीर को खत्म करता है।
- □ रक्तप्रदर को ठीक करता है।
- □ मूत्रकृच्छ्र को नष्ट करता है।
- □ श्वास रोग को दूर करता है।
- □ बाँझपन को दूर करता है।
- □ गिलोय, बाँसा, नीम, कडू परवर, कटेली-सब 600-600 ग्राम लेकर कूटपीसकर एक दोना (पते का बना एक कटोरानुमा पात्र) पानी में डालकर आग पर रखें। जब चौथा हिस्सा रह जाए तो इस काढ़े में 500 ग्राम घी और 500 ग्राम त्रिफल का काढ़ा मिलाएँ। जब घी सिद्ध हो जाए तो रोगी को खिलाएँ।
- □ कुछ रोग दूर होता है।
- □ वातरोग को नष्ट करता है।
- □ कफ, पित्त और वात-तीनों प्रकार के रोगों का नाश करता है।
- □ बवासीर को खत्म करता है।
- □ खाँसी को दूर करता है।
- □ त्रिकुटा, नागरमोथा, मीठा तेलिया, गुड़, बायबिडंग, बच, चीता-सब समान मात्रा में लेकर कूटपीसकर लेप करें।
- □ कुछ रोग को दूर करता है।
- □ 5 तोले भुने हुए चने और सेहूँड का आधा किलो दूध-दोनों को मिला लें। फिर छोटी-छोटी बेर समान गोलियाँ बना लें।
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- □ कुछ रोग को नष्ट करता है।
- □ 350 ग्राम बायबिडंग, 350 ग्राम त्रिफला चूर्ण, 50 ग्राम पोहकर्मूल, 100 ग्राम गूगुल, 25 ग्राम शिलाजीत, 500 ग्राम बावची, 25 ग्राम दालचीनी, 25 ग्राम नागरमोथा, 25 ग्राम मिर्च, 25 ग्राम अदरक, 25 ग्राम लोहभस्म, 12 ग्राम निसोथ, 25 ग्राम पीपल, 25 ग्राम तमालपत्र, 25 ग्राम केसर-सबको कूटपीसकर मिला लें। फिर दवा कीसमान मात्रा में मिश्री पीसकर मिला लें। अब 50-50 ग्राम के लडू बना लें। सुबह-सुबह एक लडू खाया करें।
- □ सब तरह का वायुरोग दूर करता है।
- □ सन्निपात को खत्म करता है।
- □ कंठ के रोगों का नाश करता है।
- □ कुछ रोगों को समाप्त करता है।
- □ कफ और पित्त से उत्पन्न रोगों को भी खत्म करता है।
लकवा की दवा
- □ 35 ग्राम सन के बीज शहद में मिलाकर सुबह खाएँ। दो हफ्ते इसका सेवन करें।
- □ 10 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम काला जीरा, 35 ग्राम बघ, 10 ग्राम पोदीना, 10 ग्राम कलौंजी-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। फिर एक पाव शहद मिलाकर खाएँ। दवा 6-7 ग्राम ही खाएँ।
- □ पक्षाघात को नष्ट करती है।
सिर दर्द की दवा
- □ गर्म पानी के साथ सनाय खाएँ।
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साहिब बन्दगी
( दमा, खाँसी... )
- □ चौकिया सोहागा, शंखिया- दोनों को अदरक के रस में मिलाकर पीसें। फिर इसकी गोलियाँ बनाकर अच्छी तरह सुखा लें। सुबह-शाम यह गोली दूध के साथ लेना बड़ा हितकारी है।
- □ 12 ग्राम लाल सज्जी, 50 ग्राम गुड़, 12 ग्राम राई, 12 ग्राम हल्दी-सबको कूटपीसकर छान लें। फिर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 1 गोली सुबह और 1 गोली शाम के समय सेवन करें।
- □ दमा ठीक होता है।
- □ 50 ग्राम मदार की अनखिली कली, 25 ग्राम लाहौरी नमक पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। एक गोली रोज सुबह के समय सेवन करें।
- □ दमे की अच्छी दवा है।
- □ 1 मदार का पत्ता और 25 काली मिर्च पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 6-7 गोलियाँ रोज खाएँ।
- □ यह दवा दमें का नाश करती है।
- □ काली मिर्च, सफेद सज्जी, हल्दी, एलुवा-सबको कूटपीसकर छान लें और छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 1 गोली रोज सेवन करें।
- □ इससे दमा ठीक होता है।
- □ 25 ग्राम ईसबन्द और 25 ग्राम अलसी पीसकर 50 ग्राम शहद में मिलाकर सेवन करें। 12 ग्राम यह दवा लें।
- □ खाँसी को नष्ट करती है।
- □ दमे का नाश करती है।
- □ 85 ग्राम गुड़, 50 ग्राम अदरक, 50 ग्राम पीपल, 50 ग्राम इलायची, 50 ग्राम मिर्च-सबको कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 12 ग्राम यह
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चूर्ण सुबह-सुबह खाना बड़ा लाभ करता है।
- □ 12 ग्राम हरड् की बकली, 20 ग्राम रूसी की पत्तियाँ, 4 ग्राम बेंग, 15 ग्राम बहेड़े का बकल, 20 ग्राम भारंगी, 8 ग्राम पीपल-सबको कूटपीसकर छान लें। फिर बबूल का काढ़ा बनाकर इसमें यह दवा मिलाएँ। फिर शहद में मिलाएँ और छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। रोज एक गोली खाएँ।
- □ खाँसी को दूर करती है।
- □ श्वास रोग की बढ़िया दवा है।
- □ क्षय रोग दूर होता है।
- □ मंदार और सेहुँड् के पत्तों को बराबर मात्रा में लेकर आग पर रखें। फिर उनमें से रस निकाल लें। पते इतने हों कि रस आधा किलो तक निकले। फिर 40 ग्राम अडूस के पते लेकर उन्हें एक किलो दूध में डालकर आग पर रखें। तीसरा हिस्सा रहने पर उतारें और छान लें। फिर ऊपर का रस भी उसमें मिला लें और पुनः आग पर रखें। गाढ़ा हो जाने पर उसमें छोटी इलायची, पीपल, अदरक, लौंग, सोहागा-सब 10-10 ग्राम लेकर कूटपीस और छानकर डालें। फिर उसकी छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली खाएँ।
- □ इससे खाँसी को आराम मिलता है।
- □ दमा रोग नष्ट होता है।
- □ बायबिडंग, चित्रक, सोहागा, जमालगोटा, अदरक, संधा नमक, मिर्च, हींग, चीता, हल्दी, सिंगरफ-सब बराबर मात्रा में लेकर कूटपीसकर छान लें। 2 रत्ती की छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली शीतल जल के साथ लें।
- □ कफ को समाप्त करता है।
- □ खाँसी को दूर करता है।
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साहिब बन्दगी
□ वायु की खराबी का नाश करता है।
कफपांडु की दवा
- □ अदरक और दशमूल को पानी में डालकर काढ़ा तैयार कर लें।
- □ कफपांडु को समाप्त करता है।
- □ संग्रहणी रोग को दूर करता है।
- □ खाँसी को दूर करता है।
- □ ज्वर को भी दूर करता है।
पित्त्पांडु की दवा
- □ 12 किलो आँवले का रस लेकर धीमी आँच पर रखें। फिर उसमें 100 ग्राम मुलहठी, 100 ग्राम अदरक, 100 ग्राम बंशलोचन, 500 ग्राम मुनक्का, ढाई किलो चीनी, 500 ग्राम पिप्पली, 500 ग्राम शहद डालें। यह दवा अत्यंत गुणकारी है।
- □ पित्त्पांडुरोग का नाश करती है।
वातपांडु रोग की दवा
- □ 200 ग्राम बायबिडंग, साढ़े तीन किलो पुराना गुड़, 400 ग्राम आँवला, 400 ग्राम हरड, 400 ग्राम बहेड़ा, 100 ग्राम जलवैत, ढाई किलो शुद्ध मंड़ुर, 100 ग्राम चीता, 200 ग्राम पीपल, ढाई किलो लोहे के अत्यंत छोटे-छोटे टुकड़े-सबको किसी बर्तन में डालकर 12 किलो पानी डाल दें। फिर 15 दिन तक रख दें। बाद में इसका सेवन करें।
- □ पाण्डु रोग का नाश करता है।
- □ बवासीर को समाप्त करता है।
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- □ कुछ रोग को खत्म करता है।
- □ खाँसी को दूर करता है।
- □ श्वास को भी लाभ करता है।
- □ पिप्पली, हरड, आँवला, बहेड़ा, चीता, अदरक, मिर्च, नागरमोथा, बायबिडंग-सबको बराबर मात्रा में लेकर 8 हिस्से लोहचूर्ण लें। सबको कूटपीसकर शहद और घी मिलाएँ। यह दवा अत्यंत गुणकारी है।
छाती के दर्द की दवा
- □ शक्कर के साथ सनाय खाएँ।
- □ अनार के शरबत के साथ सनाए खाएँ।
- □ छाती के रोग दूर होते हैं।
- □ इमली के रस के साथ सनाय खाएँ।
- □ छाती का कफ समाप्त होता है।
अण्डकोष की दवा
- □ रेंडी का तेल और दूध मिलाकर पीएँ।
- □ जमीकन्द और पलाश का चूर्ण करके 20 दिन खाएँ।
सिर की गंज की दवा
- □ अरंडी की कॉपल कूटकर उसमें तेल मिलाकर लगाएँ।
सर्वज्वर की दवा
- □ चिरायता, पिप्पली, गुरुच, अदरक, धनियाँ-पाँचों 80-80 ग्राम लेकर कूटपीसकर चूर्ण कर लें। फिर 4 किलो पानी में डालकर
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काढ़ा बना लें। आधा पानी रह जाए तो उतारकर छान लें। फिर 3 पाव मिश्री मिलाकर आँच दें। चासनी होने पर उतार दें। पिप्पली का चूर्ण मिलाकर यह शरबत सेवन करें।
- □ भूख को खोलता है।
- □ सर्व ज्वर का नाश करता है।
- □ गुरुची, छोटी इलायची, पिप्पली, बड़ी इलायची, चन्दन, उसबा, मुलहठी, धनियाँ—सब 100-100 ग्राम लेकर 10 किलो पानी में डालकर काढ़ा बना लें। जब तीन किलो पानी रह जाए तो डेढ़ किलो मिश्री मिलाकर धीमी-2 आँच पर रखें। चासनी हो जाए तो उतार लें। पिप्पली के चूर्ण के साथ यह शरबत लें।
- □ कफ, पित्त और वात-त्रिदोष का नाश करता है।
- □ गिलोय, पिप्पली, अदरक, दोनों चन्दन, मिर्च, पीपरामूल, अतीस—सब 30-30 ग्राम, 250 ग्राम चिरायता ले कूटपीसकर छान लें।
- □ सर्व ज्वर का नाश करता है।
प्रमेह की दवा
- □ पीपर, कटहल, बबूल और महुआ की छाल, चन्दन, गुरुची—सब 120-120 ग्राम लेकर कूटपीसकर 8 किलो पानी में भिगो दें। सुबह काढ़ा बनाएँ। 3 किलो रह जाए तो सवा किलो मिश्री मिलाकर शरबत तैयार कर लें।
- □ प्रमेह रोग का नाश करता है।
- □ पित्त को खत्म करता है।
सारे शरीर के दर्द की दवा
- □ 12 ग्राम काली मिर्च, 12-12 ग्राम दोनों हड़का-बकल, 12 ग्राम
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काला जीरा, 60 ग्राम मुनक्का, 12 ग्राम अदरक, 12 ग्राम करंजवा की गिरी-सबको कूटपीसकर छान लें। छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 35 ग्राम यह दवा रोज लें।
प्रदर की दवा
- □ 8 ग्राम चौराई की जड़ का रस, 12 ग्राम मुलहठी-दोनों शहद में मिलाकर पीएँ।
- □ सर्व प्रकार का प्रदर रोग दूर होता है।
- □ सफेद जीरा, कमलगट्टा, सेंधा नमक, जेठीमधु-सबका चूर्ण कर शहद के साथ खाएँ।
- □ प्रदर रोग को लाभ करता है।
पागल कुत्ते के काटे की दवा
- □ 1 ग्राम मिर्च, 1 ग्राम जीरा कूटपीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर 9-10 दिन तक सेवन करें।
- □ प्याज का रस शहद में मिलाकर काटे वाले स्थान पर लेप करें।
- □ यह लेप घाव को भरता है।
- □ शुद्ध चौकिया सोहागा, शुद्ध कुचला, शुद्ध तेलिया-तीनों बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। 125 मिली ग्राम यह दवा खाएँ। 20 दिन तक यह दवा लें।
- □ प्याज कूटकर शहद के साथ मिलाकर लेप करें।
- □ काली मिर्च, सफेद जीरा, काला जीरा सबको पीसकर पीएँ। 27 दिन तक यह दवा लें।
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बिच्छू के काटे की दवा
- ❑ नौसादर, सोहागा, कलीका चूना सबको कूटपीसकर सूँघें।
- ❑ जायफल, इन्द्रायन की जड़, हरताल सबको घिसकर लगाएँ।
- ❑ अथझड़ा का रस घिसकर लगाएँ।
- ❑ हींग और हरताल को तरंज के रस में पीसकर गोलियाँ बना लें और बिच्छू काटे की जगह पर लेप करें।
- ❑ मोम जलाएँ और जख्म वाली जगह धूनी दें।
साँप के काटे की दवा
- ❑ सफेद मंदार की भस्म, सफेद मिर्च, नीलाथोथा-तीनों बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। फिर 1-1 ग्राम की गोली बना लें। यह गोली पानी के साथ दें।
- ❑ आक की जड़ और कच्चा नीलाथोथा-दोनों समान मात्रा में लेकर कूटपीसकर चूर्ण कर लें। 5-5 ग्राम यह चूर्ण नाक में भरेँ और किसी फूँकनी से फूँकें।
- ❑ 35 ग्राम गाय के घी में 3 ग्राम लाहौरी नमक मिलाकर पिलाएँ।
- ❑ काली मिर्च और कुचला पीसकर पिलाएँ।
- ❑ 250 मिली ग्राम तूतिया, 1 ग्राम कमलगट्टा, गर्म पानी में पीसकर पिलाएँ।
- ❑ 2 ग्राम हीराहींग 2-3 बार पिलाएँ।
- ❑ 6 ग्राम फिटकरी पीसकर पिलाएँ।
- ❑ चूहे की मेंगनों का लेप करें।
- ❑ मूली में नमक मिलाकर लगाएँ।
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जहर खा लेने की दवा
- ❑ दही के साथ सनाय खिलाएँ।
अजीर्ण की दवा
- ❑ 20 ग्राम जीरा, 20 ग्राम हरड, 15 ग्राम अदरक, 25 ग्राम पोहकर मूल, 30 ग्राम कूट, 8 ग्राम बच, 12 ग्राम बिड़ नमक, 4 ग्राम हींग-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। 6 ग्राम यह दवा गर्म पानी के साथ रोगी को दें।
- ❑ बच, पीपर, हींग, सोंचरनमक, हरड सब बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। फिर किसी साफ कपड़े से छान लें। 8 ग्राम यह दवा पानी के साथ रोगी को दें।
- ❑ चित्रक, बच, अदरक, हींग, कूट, अजवाइन-सब दवा बराबर मात्रा में ले कूटपीसकर छान लें। 5 ग्राम यह दवा गर्म पानी के साथ रोगी को दें।
- ❑ यह दवा खाँसी का नाश करती है।
- ❑ वायुगोला को भी दूर करती है।
मुँह में दुर्गंध की दवा
- ❑ छुहारे के साथ सनाय खाएँ।
वातरोग की दवा
- ❑ 5 ग्राम तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम घी, 5 ग्राम मिर्च-सबको एक साथ कूटपीसकर मिला लें।
- ❑ वातरोग का नाश करता है।
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आमवात की दवा
- □ अदरक, पीपल, देवदारु, अरंड की जड़, गिलोय, मिर्च, सांठी, अमलतास, राक्षा-सबको पानी में डालकर आग पर रखें और काढ़ा तैयार कर लें। फिर अदरक का कल्क मिलाकर पीएँ।
- □ अरंड की जड़, राक्षा, अदरक, गिलोय, दारुहल्दी-सबका काढ़ा तैयार कर उसमें एरंड का तेल मिलाकर पीएँ।
पेट के कीड़ों की दवा
- □ 25 ग्राम दोनों हड़का-बकल, 60 ग्राम सोनामकखी, 12 ग्राम अदरक, 60 ग्राम गुलकंद, 12 ग्राम मुनक्का-सबको कूटपीसकर शहद में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 12 ग्राम यह दवा रोज खाएँ।
- □ जवाखार, पीपल, बिरंग, लाहौरी नमक, अजमोद, अदरक, काबुली, हड़का-बकल-सब 25-25 ग्राम, हींग 12 ग्राम ले कूटपीसकर छान लें। 6 ग्राम यह दवा सुबह खालीपेट सेवन करें।
- □ पेट के कीड़े मरते हैं।
प्लीहा रोग की दवा
- □ शुद्ध सोहागा, शुद्ध सिंगिया-दोनों बराबर मात्रा में लेकर अदरक के रस में पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें।
- □ वायुगोला, प्लीहा नष्ट होते हैं।
सिर की जूँ की दवा
- □ मूली के पत्तों के रस में पारा मिलाकर बालों में लगाएँ।
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भगन्दर रोग की दवा
- □ पीपल, बहेड़ा, आँवला, गूगुल, हर्र-सबको कूटपीसकर छान लें। 8 ग्राम इस दवा का सेवन करें।
बीस परमा की दवा
- □ दूध में मिश्री और शिलाजीत मिलाकर 20 दिन सेवन करें।
- □ गोखरू, अकरकरा, लोहासार, छोटी इलायची, त्रिकूट, जाविव्री, सतावरि, असगंध, दालचीनी, लौंग, जायफल, केसर, चीता, नागौरी-सब दवाएँ 25-25 ग्राम लेकर अच्छी तरह से कूटपीस लें। अब 650 ग्राम मिश्री लेकर कूटपीसकर इस दवा में अच्छी तरह से मिला लें। अब इसकी 8-8 ग्राम की गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली रोगी को खिलाएँ तो लाभकारी सिद्ध हो।
- □ हल्दी, अदरक रस और त्रिफला-सबको कूटपीसकर शहद के साथ दो हफ्ते रोगी को खिलाएँ।
- □ अगर काला, नागरमोथा, लौंग, छोटी इलायची, गोखरू, गिलोय, सतावरी, सफेद चंदन, चित्रक, कूट, वंशलोचन, असगंध, जायफल, निसोथ, कमलगढ़ा, नागकेसर, खस, तगर-सब दवा बराबर लेकर कूटपीसकर छान लें। अब इतनी ही मिश्री मिलाकर रख लें। 12 ग्राम यह दवा सुबह-सुबह खाएँ। बहुत लाभकारी सिद्ध होगी।
- □ 12 ग्राम गुड़ के साथ गंधक रोगी को खिलाएँ। फिर ऊपर से दूध पिलाएँ। यह दवा तीन हफ्ते करें।
- □ इलायची, शिलाजीत, शंखाहोली-सबको कूटपीसकर छान लें। यह दवा सुबह के समय पानी के साथ लें।
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साहिब बन्दगी
- □ सभी प्रकार के परमों की दवा है।
- □ गिलोय के रस में शहद मिलाकर पीना बड़ा हितकर रहता है।
- □ ग्वार को पीसकर छान लें। अब 6-7 छींटे गोभी के रस के देकर इसका चूर्ण कर लें। फिर दवा के बराबर की मिश्री मिलाकर रख लें। यह दवा 20 ग्राम पानी के साथ हररोज खाएँ।
- □ घृत परमा दूर होता है।
- □ लहसुन, जायफल, अदरक, मिर्च-सबको पानी में डाल काढ़ा तैयार कर लें।
- □ परमा रोग की बढ़िया दवा है।
- □ 5 ग्राम फिटकरी का रस पके हुए केले में डालकर खाएँ।
- □ सफेद परमा की बढ़िया दवा है।
- □ 60 ग्राम आँवले, 60 ग्राम आंबा हल्दी, 60 ग्राम मिश्री मिलाकर कूटपीसकर छान लें। 5-6 महीने खाएँ।
- □ शिलाजीत, शंखाहुली, इलायची-सबको पीसकर चूर्ण करके चीनी के साथ सेवन करें।
- □ ककही और जसवंती की पत्तियाँ बराबर मात्रा में लेकर आधा किलो पानी में डालकर अच्छी तरह से मलें। फिर इसमें तीन तोले मिश्री मिलाकर पीएँ।
- □ लाल परमा दूर होता है।
- □ एक पाव ईसबगोल शाम के समय भिगो दें। सुबह 1 नीबू निचौड़ें और 5 ग्राम मिश्री मिला लें। यह दवा 10-12 दिन तक करें।
- □ पीला परमा नष्ट होता है।
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आँखों की लाली की दवा
- □ हर, बहेड़ा और आँवला-तीनों को मिलाकर पानी में भिगो दें। लगभग डेढ़ घंटे के बाद पानी से निकालकर यह दवा आँखों में डालें।
आँखों की रोशनी की दवा
- □ आँवला, दालचीनी, संधानमक, बहेड़ा, छोटी हर, मिर्ची, पीपर-सब एक-एक ग्राम लेकर पीस लें। फिर किसी साफ कपड़े से छानकर नींबू के पतों के रस में पीसें। इसी दवा को एक दिन काली मकोय के रस में पीसें। अब इस दवा की छोटी-छोटी गोली बनाकर सुरखा दें।
- □ इस दवा को बासे पानी में घिसकर तीन हफ्ते तक आँजने से आँखों की रोशनी बढ़ती है।
दाद की दवा
- □ खुरासानी, सुहागा, अजवाइन, राल, गंधक-सबको पीसकर पानी की सहायता से छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। फिर दाद को खुजाकर उस पर लगाएँ।
- □ पवांड के बीज और मदार के फूलों को पीसकर खट्टे दही में मिलाएँ और मालिश करें।
- □ कुचले को सिरके में पीसकर लगाएँ।
- □ मूली के बीज शराफ के पतों के रस में पीसकर लगाएँ।
- □ इमली के बीज सिरके में पीसकर लगाएँ।
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साहिब बन्दगी
नाक की बीमारी की दवा
- □ ईसबगोल को सिरके में भिगोकर माथे पर लेप करें।
- □ गाय का गोबर जलाकर नाक में फूँकें।
- □ बेरी के पत्ते पीसकर माथे पर लेप करें।
पेशाब बार-बार आने की दवा
- □ सूखे हुए सिंघाड़े कूटपीसकर छान लें। फिर इसमें शक्कर मिलाकर खाएँ। 12 ग्राम यह दवा लें।
- □ काले तिल में शक्कर मिलाकर सेवन करें।
- □ बबूल की सूखी फली कूटपीसकर छान लें। फिर इसे घी में भूनकर शक्कर मिलाकर सेवन करें। दवा 5-6 ग्राम ही लें।
आग से जल जाने की दवा
- □ इमली की छाल पीसकर घी में मिलाकर लगाएँ।
पेशाब बंद हो जाने की दवा
- □ चूहे की मँगनें पीसकर नाभि के नीचे लगाएँ।
- □ 1 ग्राम कलमी शोरा, 1 ग्राम राई और इसके बराबर शक्कर मिलाकर सेवन करें।
आँखों की फूली की दवा
- □ ऊपर आँखों की रोशनी वाली दवा को शहद में घिस कर अंजन की तरह लगाएँ।
- □ हफ्ते तक आँजने से आँखों की फूली ठीक होती है।
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पाण्डु रोग की दवा
- □ सोनामाखी, बेर की गुठली, त्रिकुट, तज, मिर्च-सब बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। अब किसी साफ कपड़े से छान लें। अब इस चूर्ण की शहद के साथ छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें।
- □ सुबह 1 गोली छाछ के साथ खाने से पाण्डुरोग दूर होता है।
खाँसी की दवा
- □ काकड़ासिंगी कूटपीसकर छान लें। फिर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सोते समय लें।
- □ बलगमी खाँसी को दूर करती है।
- □ 3 ग्राम सफेद सज्जी, 12 ग्राम हल्दी पानी में पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सोते समय लें।
- □ नौसादर लेकर आधा भून लें। फिर उतनी ही काली मिर्च मिलाकर घीकुंआर के रस में पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। माँ के दूध में यह गोली पीसकर पिलाएँ।
- □ लौंग, नमक और काली मिर्च-सबको तवे पर रखकर जला लें और सोते समय लें।
शीतपित्त की दवा
- □ गुड़ में अजवाइन मिलाकर रोगी को ढाई से तीन हफ्ते तक खिलाएँ।
आँखों की पीड़ा
- □ हींग, गुड़, केसर, मिर्च, सेंधा नमक-सबको पानी में पीसकर सूँघें।
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साहिब बन्दगी
- □ सिर और आँखों की पीड़ा दूर होती है।
- □ हीराकशीश, रसौत, घी, शहद-सब बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। फिर स्त्री के दूध में मिलाकर आँखों में अंजन की तरह लगाएँ।
- □ आँखों की पीड़ा दूर होती है।
उपदेश की दवा
- □ 50 ग्राम आँवला, 12 ग्राम जमालगोटा-दोनों को कूटपीसकर साफ कपड़े से छान लें। फिर नींबू के रस के साथ पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। यह गोली ठंडे जल से सुबह के समय दो हफ्ते सेवन करें।
- □ 10 ग्राम गुलारमनी मिट्टी में इतना ही कलमीशोरा-दोनों को पीसकर 3 किलो पानी में मिलाएँ। यह पानी रोगी के लिए अत्यंत लाभकारी है। इससे पेशाब खुलकर होगा।
- □ 25 ग्राम मिर्च, 70 ग्राम भुंगराज-दोनों को पूरा दिन कूटपीसकर अच्छी तरह से मिला लें। फिर बेर के बराबर की गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम एक-एक गोली खाएँ।
- □ सफेद खैर, सफेद सुपारी, शुद्ध शंखिया, भुंगराज, अकरकरा-सब 5-5 ग्राम लेकर कूटपीस लें। फिर किसी साफ कपड़े से छान पानी में घोंटकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली पानी के साथ लें। हफ्ते-भर में यह गोली लाजवाब असर दिखायेगी।
- □ 12 ग्राम आक की जड़, 35 ग्राम मिर्च लेकर अच्छी तरह से कूटपीस लें। फिर इसमें गुड़ मिलाकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली खाएँ। बड़ी हितकारी है।
सेहत संजीवनी
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क्षयरोग की दवा
- □ चन्दन, कपूर, लौंग, जटामांसी, इलायची, कमलगढ़ा, अगर, जीरा, उशीर, नागकेसर, कंकोल, वंसलोचन, तज, नागरमोथा, पीपल, अरूवारी, जायफल, तगर—सब 25-25 ग्राम लेकर कूटपीस लें। फिर दवा से आधी मात्रा मिश्री की लेकर इसमें मिला लें। दवा तैयार है।
- □ क्षयरोग दूर होता है।
- □ गले के रोग भी दूर होते हैं।
- □ अतिसार की बढ़िया दवा है।
- □ संग्रहणी रोग की भी अच्छी दवा है।
श्वास की दवा
- □ 1 किलो बड़ी हरड, 1 किलो भारंगी, 1 किलो दशमूल, 10 किलो पानी में डालकर आग पर रखें। जब तीसरे हिस्से से कम रह जाए तो किसी साफ कपड़े से छान लें। फिर उसमें डेढ़ किलो गुड़ मिलाएँ और दुबारा आग पर रखें। जब चटनी हो जाए तो उतार लें। फिर उसमें 350 ग्राम शहद, 60 ग्राम मिर्ची, 60 ग्राम अदरक, 60 ग्राम पीपल, 60 ग्राम तमालपत्र, 35 ग्राम यवाखार, 60 ग्राम दालचीनी, 60 ग्राम इलायची—ये सब दवाएँ डालें। इन सबका चूर्ण करके ही डालें और अच्छी तरह से मिला लें। यह भारंगी गुड़ तैयार हो गया।
- □ यह कई प्रकार के श्वास की बेहतरीन दवा है।
- □ खाँसी की भी यह बढ़िया दवा है।
- □ 85 ग्राम वंसलोचन, 85 ग्राम पीपर, 25 ग्राम इलायची, 12 ग्राम दालचीनी, 150 ग्राम मिश्री लेकर सबका चूर्ण कर लें। इस चूर्ण
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साहिब बन्दगी
को घी और शहद मिलाकर खाएँ।
- □ दालचीनी, पीपल, अदरक, भीमसेनी कपूर, कचूर, गिलोय, नागरमोथा, कमलकंद, पुष्करमूल, भूमि आँवला, तुलसी, काला अगर, इलायची-सब समान मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को दो गुणा चीनी में मिलाकर रोगी को खाना चाहिए।
- □ 5 ग्राम गन्धक, 5 ग्राम मैनशिल, 5 ग्राम पारा, 5 ग्राम पीपल, 5 ग्राम मिर्च-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। अब पानी की सहायता से इसकी गोलियाँ बनाएँ।
- □ यह गोली श्वास और खाँसी के लिए बहुत लाभकारी है।
अतिसार की दवा
- □ शिलाजीत, बेलगिरी, पीपलामूल, अदरक, चित्रक, राल, गजपीपर, पीपर-सब बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से कूटपीस लें। अब किसी साफ कपड़े से छानकर रख लें। 8 ग्राम यह दवा बड़ी लाभकारी सिद्ध होगी।
- □ अजमोद, मोचरस, अदरक-सबको कूटपीसकर चूर्ण कर लें। यह चूर्ण छाछ के साथ सेवन करें।
- □ बेल का गूदा, इन्द्रयव, लोध, मोचरस-सबको पीसकर गुड़ के साथ मिलाकर गोलियाँ बना लें।
- □ अतिसार में लाभकारी है।
कफातीसार की दवा
- □ हींग, बच, कालानोन, अतीस, संधानोन-सब बराबर मात्रा में ले अच्छी तरह से कूटपीसकर छान लें। 8 ग्राम यह दवा गर्म