शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ६ ) शाली बताया है और संभव है कि पूरा विधि-विधान करने पर तात्का- -लिक लाभ की दृष्टि से उनका कथन सही हो । फिर भी समय के प्रभाव से तन्त्र मार्ग में कुछ ऐसी बातें शामिल हो गई हैं जिनको अन्य लोग शंका की दृष्टि से देखते हैं और आक्षेप करते हैं। पंचमकार और मारण-मोहन-उच्चाटन, वशीकरण आदि क्रियायें ऐसी ही हैं, जिन पर आधुनिक युग के विचारक और विद्वान् पुरुष कभी सहमत नहीं हो सकते और न उनकी नैतिकता और धामि- कता को स्वीकार कर सकते हैं। आध्यात्मिकता अथवा दैवी शक्तियों का नाम लेकर किसी को नष्ट अथवा भ्रष्ट करने का प्रयत्न करना अथवा ऐसा इरादा ही करना घृणित और हेय कर्म ही माना जायगा। इसी प्रकार किसी देवी या देवता की आराधना इस विचार से करना कि वे हमारे विरोधियों का सर्वनाश कर डालें उन देवी-देवताओं के प्रति भी कोई अच्छा काम नहीं है। किसी देव शक्ति का प्रतिपादन इस रूप में करना कि वह पूजा अथवा बलिदान के लोभ से चाहे जिस व्यक्ति का अकल्याण कर सकती है, उसके प्रति आदरणीय भावना को मिटाने वाला ही सिद्ध होगा। नासमझ, दुष्ट और बाल बुद्धि वालों की बात तो छोड़ दीजिये, पर कोई विद्या-बुद्धि से सम्पन्न सज्जन पुरुष इस प्रकार के कृत्यों को 'धर्म' का अङ्ग नहीं मान सकता। इसलिए हमने 'शारदा तिलक' के उपयोगी और आध्यात्मिक भाव को बढ़ाने वाले विधि विधान और धर्म क्रियाओं को स्थिर रखते हुए जिन अध्यायों अथवा वर्णनों में हमको उपयुक्त ढंग की आक्षेप योग्य बातें दिखाई पड़ीं उनको अधिकांश छोड़ दिया है। साथ ही जहाँ कहीं विषय का बहुत अधिक विस्तार देखा वहाँ भी संक्षेप कर दिया है। वर्तमान समय में लोगों की जीवन निर्वाह सम्बन्धी विभिन्न प्रवृत्तियाँ इतनी विस्तार युक्त और जटिल हो गई हैं कि उन्हे बहुत लम्बे चौड़े विवेचन हमने उपयोगिता और जानकारी की रक्षा करते हुए कहीं-कहीं ग्रन्थ को इस प्रकार संक्षेप किया है कि पाठक उसको पढ़कर आशय को अधिक अच्छी तरह ग्रहण कर सकेंगे। २५-३-७३ -प्रकाशक