भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 9, कुल 511 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 9

( ५ ) कही गई है । "महानिर्वाण तंत्र" में शिवजी के मुख से कहलाया है— कलौ तन्त्रोदिता मन्त्राः सिद्धास्तूर्ण फलप्रदाः । शस्ताः कर्मसु सर्वेषु जप यज्ञ क्रियादिषु ।। निर्वीर्याः श्रौत जातीया विषहीनोरगाइव ।। अर्थात्— 'कलियुग में तन्त्र-शास्त्र द्वारा प्रतिपादित मन्त्र ही सिद्ध होकर शीघ्र फल दे सकते हैं । इसलिये सब प्रकार के धार्मिक कृत्यों में जप, यज्ञ आदि में वे ही श्रेष्ठ और विहित हैं । इस युग में वैदिक कर्म- काण्ड तो विषहीन सर्प की भाँति अशक्त हो जाते हैं ।" तंत्र-ग्रन्थों में इस प्रकार के सैकड़ों वचनों के होते हुए भी विद्वान् लोग इस सिद्धांत को सहज में स्वीकार नहीं कर सकते । जिस प्रकार "महानिर्वाण" के रचयिता ने तंत्रोक्त क्रियाओं को फलवती बताया है, उसी प्रकार भक्तिमार्ग के प्रधान आचार्य गोस्वामी तुलसीदास जी की अमरवाणी भी हमको "रामायण" में सुनाई पड़ती है—'कलियुग केवल नाम अधारा ।" इस अद्वितीय घोषणा पर विश्वास करके आज लाखों- करोड़ों नर-नारी 'नाम संकीर्तन' में तल्लीन हैं और उसी को आत्मा की सद्गति का सर्वोत्कृष्ट मार्ग मान रहे हैं । फिर भी तन्त्र-शास्त्र उपेक्षा का विषय नहीं है । किसी समय इस शास्त्र की अभूतपूर्व उन्नति हुई थी और लाखों नर-नारी इससे लौकिक और पारलौकिक सत्परिणाम प्राप्त करते थे । उस समय इतना अधिक तन्त्र-साहित्य रचा गया है जिससे आज भी एक पूरा पुस्तकालय भर सकता है । उन हजारों छोटे-बड़े ग्रन्थों में 'शारदा तिलक' एक महत्व पूर्ण रचना है । तन्त्रोक्त धर्म और आचार-विचार, व्यावहार का प्रति- पादन करने वाला यह एक प्रसिद्ध और मान्य ग्रन्थ है । इसमें तन्त्र-शास्त्र के मतानुसार सृष्टि और विश्व-रचना का उचित विवेचन करते हुए इसके व्यावहारिक पक्ष का विस्तार पूर्वक वर्णन किया है । मनुष्य किस प्रकार दीक्षा ग्रहण करके तांत्रिक-साधना का अधिकारी बन सकता है, इसके प्रत्येक विधि-विधान का ऐसा स्पष्ट रूप से समझा कर वर्णन किया गया है कि नया व्यक्ति भी उससे बहुत लाभ उठा सकता है । तन्त्र मार्ग के रचयिताओं से अपने विधि विधानों और क्रियाओं को बहुत शक्ति