भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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षष्ठ पटल ] [ १२३ समुच्चय हैं, जिसके करकमलों में मुद्रा, अक्षमाला, सुधा से परिपूर्ण दो कलश और विद्या धारण किये हुए हैं, विशद प्रभा को धारण करती हुई और तीन नयनों से समन्वित वाग्देवता का मैं समाश्रय ग्रहण करता हूँ ।४। मातृका के वर्णों का क्रम से ललाट मुख, वृत्त, नेत्र, कान, नासिका, दोनों कपोल, ओष्ठ, दाँत, मस्तक, मुख, संधियों का अग्रभाग, दोनों पार्श्व, पृष्ठ-नाभि, उदर, हृदय, कन्धा, ककुद्यंस, हृत्पूर्ण, दोनों हाथ, दोनों चरण, जठर और आनन में न्यास करना चाहिए। तथा त्वचा, रुधिर, मांस मेद, अस्थि, शुक्र के स्वरूप वालों में भी न्यास करे ।५-७। वादिहान्तान् न्यसेदात्मपरमज्ञानपूर्वकान् । दीक्षितः प्रोक्तमार्गेण न्यसेल्लक्ष समाहितः ।८ जपेत्तत्संख्यया विद्वानयुतं मधुराप्लुतैः । विदधीत तिलैर्होमं मातृकामन्वहं जपेत् ।९ व्योमेन्द्वौरसनार्णं कर्णिकमर्चां द्वन्द्वैः स्फुरत्केसर पत्रान्तर्गतपञ्चवर्ग यशलार्णादित्रिवर्ग क्रमात् । आशास्वस्रिषु लान्तलाङ्गलियुजा त्रोणापुरेणावृतं पद्मं कल्पितमन्त्र पूजयतु तां वर्णात्मिकां देवताम् ।१० आधारशक्तिमारभ्य पीठशक्त्यन्तमर्चयेत् । मेधा प्रज्ञा विद्या श्रीर्वृतिस्मृतिबुद्धयः ।११ विद्येश्वरीति सम्प्रोक्ता भारत्या नव शक्तयः । वर्णाब्जेनासनं दद्यान्मतिम्मलेन कल्पयेत् ।१२ आवाह्य पूजयेत्तस्यां देवीमावरणैः सह । अङ्गैरावरणं पूर्वं द्वितीयं युग्मशः स्वरैः ।१३ अष्टवर्गैस्तृतीयं स्यात्तच्छक्तिभिरनन्तरम् । पञ्चमं मातृभिः प्रोक्तं षष्ठं लोकेश्वरैः स्मृतम् ।१४ लकार से आदि हकार के अन्त तक आत्म परम ज्ञान पूर्वकों का दीक्षित व्यक्ति न्यास करे । और परम समाहित होकर एक लाख जप