शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसप्तम पटल ] [ १४७ न्यास करे । १८-१९। क्रम से शादि तीन वर्णों का गुह्य-हृदय और भ्रूविल में न्यास करना चाहिए । सृष्टि में सर्ग के अवमान वाली होवे और स्थिति में यहित, जल, आकाश और भूमि के क्रम से विन्दु और विसर्ग के अवसान वाली का न्यास करे । और संहार में प्रतिलोम से विन्दुभूषिता का न्यास करना चाहिए । २०-२१। आगमोक्तेन मार्गेण दीक्षितः साधकोत्तमः । लक्षं न्यसेजपेत्तावदयुतं जुहुयात्तिलैः ।२२ पूजयेदन्वहं देवीं पीठे प्रागीरिते सुधीः । वर्णाब्जेनासनन्दद्यान्मूर्त्तिं मूलेन कल्पयेत् ।२३ देवीं सम्पूजयेत्तस्यामङ्गाद्यावरणान्यजेत् । आदावङ्गावृत्तिः पश्चादम्बिकाद्याभिरीरिता ।२४ द्वितीया मातृभिः प्रोक्ता तृतीया द्वष्टशक्तिभिः । चतुर्थी पञ्चमी प्रोक्ता द्वात्रिंशच्छाक्तिभिः पुनः ।२५ चतुः षष्ठ्या स्मृता षष्ठो शक्तिःभिर्लोकनायकैः । सप्तमी पुनरेतेषामस्त्रैः स्यादष्टमावृत्तिः ।२६ एवं पूज्या जगद्धात्री श्रीभूतलिपिदेवता । स्थानेषु तेषु विधिवदभ्यर्च्य्याङ्गानि पूर्ववत् ।२७ आगमों में वर्णित मार्ग से साधकों में उत्तम दीक्षित होकर एक लाख जप करे और दश सहस्र तिलों के द्वारा होम करना चाहिए ।२२ सुधी को चाहिए कि वह पूर्व में वर्णित पीठ पर देवी का प्रतिदिन पूजन करे । वर्णाब्ज से आसन अर्पित करे । और मूल मन्त्र के द्वारा मूर्त्ति की कल्पना करे ।२२! उसमें देवी का भली-भाँति पूजन करे और अंग आदि आवरणों का यजन करना चाहिए । आदि में अंगों की आवृत्ति और पीछे अम्बिकाद्याओं से कही गयी है । २४। दूसरी मातृकाओं से बतायी गयी है । तीसरी सोलह शक्तियों के द्वारा होती है । फिर चौथी और पाँचवी बत्तीस शक्तियों से कही गयी हैं ।२५। शक्तियों से और लोक नायकों के द्वारा चौंसठ से छठवीं बतायी गयी