भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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अष्टम पटल ] [ १७७ वाला है अर्थात् उसमें रत्न लगे हुए हैं। उस मण्डप के आठ कपाट (किवाड़) हैं। वह नव रत्नों से अन्वित हैं और उसमें ऊँचे गोपुर और तोरण हैं ।६२।६३। हेमदण्डसमालंबि ध्वजावलिपरिष्कृतम् । नवरत्नसमाबद्धस्तम्भराजिविराजितम् ।६४ सहस्रदीपसंयुक्तदीपदण्डविराजितम् । तप्तहाटकसङ्क्लृप्तवातायनमनोहरम् ।६५ जानावर्णांशुकोबद्धसुवर्णशतकोटिभिः । किंकिणीमालिकायुक्तं पताकाभिरलङ्कृतम् । ६६ जातरूपमयैरत्नविचित्रैरतिविस्तृतैः । माणिक्यरत्नैर्वैदूर्यस्वर्णमालावलीयुतैः । ६७ अन्तरान्तरसम्बद्धरत्नैहृष्टिमनोहरैः । विचित्रैश्चित्रवर्णैश्च वितानैरुपशोभितम् । ६८ सर्वरत्नसमायुक्तं हेमकुट्टिसमुज्ज्वलम् । केतकीमालतीजातीचम्पकोत्पलकेसरैः । ६६ मल्लिकातुलसीजातीनन्द्यावर्तकदम्बकैः । एतैरन्यैश्च कुसुमैरलङ्कृतमहीत लम् । ७० उस मण्डप पर ध्वजाएं लगी हुई हैं, जिससे सुपरिष्कृत हो रहा है और वे ध्वजाएं सुवर्ण रचित दण्डों में बँधी हुयीं हैं। नौ प्रकार के रत्नों द्वारा समाबद्ध खम्भों से शोभायमान है ।६४। सहस्रों द्वीप दण्डों में सहस्रों ही दीपों से समायुक्त है । उस मण्डप में वातायनों की परम सुन्दरता है जो तपाये हुए सुवर्ण से सकॢप्त हैं ।६५। अनेक वर्ण के वस्त्रों से उपबद्ध हैं जिसमें सैकड़ों करोड़ सुन्दर वर्ण हैं । वह किंकिणियों की मालाओं से समन्वित है । और बहुत—सी पताकाओं से युक्त है ।६६। वह वितानों से उपशोभित हैं जो सुवर्ण से परिपूर्ण रत्नों से विचित्र हैं और अत्यधिक विस्तार वाले हैं । जो माणिक्य ( लाल वर्ण का रत्न ) रत्नों से और वैदूर्य एवं स्वर्ण की मालाओं से संयुत है ।६७। बीच-