शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 189, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टम पटल ] [ १८६ करावे। यह अभिषेक पुरुषों के लिए सभी सम्पदाओं का करने वाला होता है—सब प्रकार से सौभाग्यों का और सिद्धियों का प्रदान करने वाला है। स्त्रियों क गर्भ की रक्षा करने वाला है और परमदीर्घ आयु के समुत्पन्न करने वाला है। जो स्त्रियाँ प्रसव कर चुकी हैं उनके प्रसूत गृह की रक्षा करने वाला यह अभिषेक होता है—ऐसा आगमों के ज्ञाता मनीषी गण कहा करते है ।१३४।१४०। वेदादिस्थितसाध्यनाम युगशः श्रीशक्तिमारान्वितं किञ्जल्केषु दिनेशपत्रविलसन्मन्त्राक्षर तद्वहि। पद्म व्यञ्जनकेसरं स्वरलसत्पत्राष्टयुग्मं धरा- विम्बभ्यां वषदन्तया त्वरितया यन्त्रं लिखेद्वेष्टितम् ।१४१ भूपुरद्वयकोणेषु हक्षौ लेख्यौ पुनःपुनः । महालक्ष्मीयन्त्रमिदं सर्वैश्वर्यफलप्रदम् ।१४२ सर्वदुःखप्रशमनं सर्वापद्विनिवारणम् । बहुना किमिहोक्तेन परमस्मान्न विद्यते ।१४३ शम्भुपत्नी श्रिया रुद्धा कमौ भगवतां मही। प्रह्रादित्यौ धरादीर्घा लः क्षादिर्भगवान् मरुत् ।१४४ प्रसीदयुगलं भूयः श्रीरुद्धा भुवनेश्वरी । महालक्ष्म्यै नमोऽन्तः स्यात्प्रणवादिरय मनुः ।१४५ सप्तविंशत्यक्षराढ्यः प्रोक्तः सर्वसमृद्धिदः । कमले हृदयेप्रोक्तं शिरः स्यात्कमलालये ।१४६ शिखा प्रसीद तेनैव कवच चतुरक्षरः । अस्त्रमेतैः पदैः कुर्यात्त्रिबीजपुटितैः पृथक् ।१४७ अब मन्त्र के विषय में बतलाया जाता है—यन्त्रपद्म के रूप वाला है—ऐसा ही उसे लिखे—प्रणव में स्थित साध्य साधक के कर्म का नाम हो अर्थात् उसकी कर्णिका में होना चाहिए। दो वार श्री शक्ति और मार से संयुत होवे—आद्य में किंजल्क में श्रीशक्ति हो और परमें मार और श्री होवे—बारह दलों में शोभित मन्त्र के अक्षर होवे।