भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 19, कुल 511 में से

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श्री शारदा तिलक ] [ १५ नासिका ये पाँच हैं । ज्ञानेन्द्रियों के शब्द आदि अर्थ अर्थात् विषय होते हैं। ऐसा बताया गया है। पाँच ही कर्मेन्द्रियाँ होती हैं, कर्मेन्द्रियों के नाम ये हैं-वाक्-पाणि (हाथ)-पाद-पायु और अन्धु अर्थात् लिङ्ग । मनीषियोंने इनको विषय अर्थात् कर्मभी बतलाये जातेहैं-वचन, आदान, गमन, विसर्ग और आनन्द ये पाँचों क्रम से कर्म हैं ।३५-३६। कर्मेन्द्रियार्थाः संप्रोक्ता अन्तःकरण मात्मनः । मनोबुद्धिरहङ्कारश्चित्तं च परिकीर्तितम् ।३७ दशेन्द्रियाणि भूतानि मनसा सह षोडश । विकाराः स्युः प्रकृतयः पञ्चभूतान्यहङ्कृतिः ।३८ अव्यक्तं महदित्यष्टौ तन्मात्राश्च महानपि ।४ साहङ्कारा विकृतयः सप्त तत्त्वविदोविदुः ।३६ अग्नीषोमात्मकोदेहो बिन्दुर्यदुभयात्मकः । दक्षिणांशः स्मृतः सूर्यो वामभागो निशाकरः ।४० नाडीदेश विदुस्तासु मुख्यास्तिस्रः प्रकीर्त्तिताः । इडा वामे तयोर्मध्ये सुषुम्णा पिङ्गला परे ।४१ मध्या भास्वपि नाडीस्यादग्नीषोमस्वरूपिणी । गान्धारी हस्तिजिह्वाख्यासुपूषाऽलम्बुषा मता ।४२ यशस्विनी शंखिनी च कुहूः स्युः सप्त नाडयः (डिकाः) । नाड्योऽनन्ताः समुत्पन्नः सुषुम्णा पञ्चपर्वसु ।४३ मूलाधारोद्गतप्राणस्ताभिर्व्याप्नोति तत्तनुम् । वायवोऽत्र दश प्रोक्ता वह्नयश्च दश स्मृताः ।४४ प्राणाद्या मरुतः पञ्चः नागः कूर्मो धनञ्जयः । कृकलः स्याद्देवदत्त इति नामभिरीरिताः ।४५ ये कर्मेन्द्रियाँ बतला दी गयी हैं। अब आत्मा के अन्तकरण अर्थात् अन्दर में रहने वाली इन्द्रियाँ मन-बुद्धि-अहङ्कार-और चित ये कही गयी हैं ।३७। दश ज्ञानेन्द्रियाँ और कर्मेन्द्रियाँ तथा पाँचभूत और सोल- हवाँ मन ये विकार हैं जो प्रकृतियों के हैं । पाँचभूत-अहङ्कार-अव्यक्त

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