शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२०२ ] [ श्री शारदा तिलक बर्ह्ये कोणगर्तैयुतं हरिहरैर्वर्णैः कपोचार्पितैः । पश्चात्तैः पुनरीयुतैर्लिपिभिरप्यावीतमिष्टार्थदं । यन्त्रं भुपुरमध्यगं त्रिगुणितं सौभाग्यसम्पत्प्रदम् ।५२ बीजान्तः स्थितसाध्यनामशरशोभायारमामन्मथैः । वीतं वह्निपुरद्वये रसपटे स्वाख्याढ्यबीजत्रषम् । स्वात्मानात्मकमीं शिख हरिहरैरात्रद्धगण्डंबहिः- षड्वोजैरनुवद्धसंधिलिपिभिर्वीतं गुहाध्यां भुवः ।५३ चिन्तामणिर्नृसिंहाभ्यां लसत्कोणमिदं लिखेत् । यन्त्रं षड्गुणितं दिव्य वहतां सर्वसिद्धिदम् ।५४ बीजं व्याहृतिभिर्वृतं गृहयुगद्वन्द्व वसोः कोणगः । दौर्ग बीजमनन्तरं लिपियुगैराबद्धगण्ड लिखेत् । गायत्र्या रविशक्तिवद्धविवरं त्रिष्टुब्वृतं तत्ततो- वीतं मातृकयो धरापुरयुगे सत्सिंहचिन्तामणिम् ।५५ मन्त्रं दिनेशगुणितं प्रोक्तं रक्षाप्रसिद्धिदम् । सर्वसौभाग्यजननं सर्वशत्रुनिवारणम् ।५६ मंत्रधारी उस मन्त्रसे अन्तको अभिमन्त्रित करके उसका अशन करे तो श्री की प्रकृष्ट सिद्धि हो जाया करती है । साध्यके सहित माया को भस्मसे फलक (पट्टे आदि) पर लिखे उस मन्त्रको गर्भिणीको दिखावे तो वह तत्काल में सुखपूर्वक प्रसव किया करती है ।५०।५१। अब त्रिगुणित मंत्र बतलाया जाता है जो कि सौभाग्य और सम्पदा के प्रदान करने वाला होता है ऊर्ध्व के अग्रभाग में त्रिकोण में मध्य में शक्ति बीज स्थित है उसमें साध्य—साधक का कर्म हो और शक्तियों से वृत होंगे । वाह्य में अर्थात् त्रिकोण के अग्रभागों में कमोसार्पित अर्थात् गण्ड स्थल लिखित हरिहर वर्णों से कोण के गर्त्त में संयुत पीछे फिर उन ईकार युत लिपियों से भी आवीत हो—यह भूपुर के मध्य में स्थित यन्त्र अभीष्ट अर्थ का दाता होता है ।५२। अब षड्गुणित यन्त्र बतलाते हैं- वह्नि का तात्पर्य यह है कि परस्पर में व्यति भिन्न त्रिकोण द्वय में