भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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पृष्ठ 204

२०४ ] [ श्री शारदा तिलक षट् कोणमध्ये प्रविलिख्य शक्तिं कोणेषु तामेव विलिख्यः भूयः। ससाध्यगर्भं वसुधापुरस्थं यन्त्रं भवेद्वश्यकरं नराणाम् ।५८ वाग्भवं शम्भुवनिता रमा बीजत्रयात्मकम् । मन्त्र समुद्धरेन्मंत्री त्रिवर्गफलसाधनम् ।५६ षडदीर्घर्घभाजा मध्येन वाग्भवाद्येन कल्पयेत् । षडङ्गानि मनोरस्य जातियुक्तानि मन्त्रवित् ।६० कुर्यात्पूर्वोदितान्न्यासान् तथैवात्रापि साधकः ।६१ सिन्दूरारुणविग्रहां त्रिनयनां माणिक्यमौलिस्र्फुरा त्तारानायकशेखराँ स्मितमुखीमापीनवक्षोरुहाम् । पाणिभ्यां मणिपूर्णरत्नचषक रत्नोत्पलं बिभ्रतीं । सौम्यां रत्नघटस्थसव्यचरणां ध्यायेत्परामम्बिकाम् ।६२ रविलक्षं जपेन्मंत्रं पायसैर्मधुरप्लुतः । दशांशं जुहुयान्मन्त्री पीठे प्रागीरिते यजेत् ।६३ छैः पत्रों से संयुत पद्म को लिखे और मध्य में दलों में माया का अभिलेखन करे । यह स्वरों से समावृत यन्त्र भूमिगृह के अन्दर स्थित करे तो बँधुओं को पुत्र प्रदान करने वाला होता है ।५०। षट्कोण के मध्य में शक्ति को लिखकर फिर उसी का लेखन कोणों में करना चाहिए । गर्भ में साध्य के सहित भूपुर में स्थित यह यन्त्र मनुष्य का वश्य करने वाला होता है ।५८। वाग्भव—शम्भु वनितां और रमा अर्थात् सरस्वती, शिवा और लक्ष्मी, इन तीन बीजों के स्वरूप वाला मन्त्र है । मन्त्रधारी इसका उद्धार करे । यह तीन वर्गों के फल को साधने वाला है ।५६। छै दीर्घों के भजने वाले वाग्भवाद्य मध्य से कल्प- ना करे । मन्त्र का ज्ञाता पुरुष इस मन्त्र के जातियुक्त छै अङ्गों की कल्पना करे । ६०। साधक पूर्व में उति न्यासनों को उसी भाँति यहाँ पर भी करना चाहिए ।६१। अब मन्त्र का ध्यान बतलाया जाता है— सिन्दूर के समान शरीर वाली तीन नेत्रों से समन्वित, मणिक्य मौलि में स्फुरित चन्द्रशेखर से युक्त-मुस्कानयुक्त मुखवाली—स्थूल