भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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अष्टम पटल ] [ २०५ स्तनों से संयुत —दोनों हाथों में मणियों से पूर्ण रत्ननिर्मित चषक और रक्त कमल को धारण करती हुई-परम सौम्य स्वरूप रूप वाली— रत्नों के घट में दाहिने चरण को रखने वाली परा अम्बिका का ध्यान करना चाहिए ।६२। इस मन्त्र का बारह लाख जप करना चाहिए और मधुरप्लुत पायस के द्वारा आहुतियाँ देवे जो जप की दशांश ही होवें। मंत्रधारी को पूर्व में वर्णित पीठ में ही यजन करना चाहिए ।६३। देवीं प्रागुक्तमार्गेण गन्धाद्यै रतिशोभनैः । हुत्वा पलाशकुसुमैर्वाक्श्रियं महतीं व्रजेत् ।६४ ब्राह्मीघृत पिभेज्जप्तं कवित्वं वत्सराद्भवेत् । सिद्धार्थान् लवणोपेतान् हुत्वा मन्त्री वशं नयेत् ।६५ नरनारीनरपतीन् नात्रकार्या विचारणा । चतुरङ्गुलजैः पुष्पैः चन्दनाम्भः समुक्षितैः ।६६ हुत्वा वशीकरोत्याशु त्रैलोक्यमपि साधकः । जुहुयादरुणाम्भोजैर्युतं मधुरप्लुतैः ।६७ राज्यश्रियमवाप्नोति सतिलैस्तण्डुलैस्तथा । प्रागुक्तान्यपि कर्माणि मन्त्रेणानेन साधयेत् ।६८ वाग्बीजपुटिता माया विद्येयं त्र्यक्षरी मता । मध्येन दीर्घयुक्तेन वाक्पुटेन प्रकल्पयेत् ।६६ अङ्गानि जातियुक्तानि क्रमेण मन्त्रवित्तमः । यथा पुरा समुद्दिष्टान् न्यासान्कुर्वीत मन्त्रवित् ।७० पूर्व में कथित मार्ग के द्वारा अतीव शोभन गन्धादि से देवी का ढाक के पुष्पों से हवन करके साधक बहुत बड़ी श्री की प्राप्ति किया करता है ।६४। मन्त्र के द्वारा जप किए हुए ब्राह्मी घृत का पान करे तो एक ही वर्ष के अन्दर कवित्व को प्राप्त कर लिया करता है । लवण से संयुक्त सिद्धार्थों का हवन करके मन्त्रधारी वश में कर लेता है ।६५। मनुष्य नरों को नारियों को और नरपतियों को सभी को अपने वश में कर लिया करता है-इसमें कुछ भी संशय नहीं करना चाहिए । साधक