भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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दशम पटल ] [ २१६ पूर्व में वर्णित पीठ पर महिष मर्दिनीका यजन करना चाहिए ।२७। पत्रों अङ्गों का पूजन करना चाहिए । दुर्गा, वरवर्णिनी, आर्या, चौथी कनक प्रभा, पाँचवी कृतिका, छटवीं अभयप्रदा, कन्या स्वरूप का मन्त्र धारी क्रम से दीर्घ स्वरों से प्रभजन करे ।२८-२६। यजेदग्रेष्वायुधानि चक्रशङ्खासिखेटकान् । वाणं बाणासनं शूल कपाल यादिभिः क्रमात् । ३० लोकपालाः पुनः पूज्यास्तदस्त्राणि ततः परम् । वशयेत्तिलहोमेन नरान्नृपतीनपि ।३१ सिद्धार्थैर्हुयान्मन्त्री रोगा-मुच्येत तत्क्षणात् । पद्मैर्हुत्वा जयेच्छत्रून्दूर्वाभिःशान्तिमाप्नुयात् ।३२ पलाशंकुसुमैः पुष्टिं धान्यैर्धान्यश्रियं व्रजेत् । काकपक्षैः कृतोहोमो द्वेषं वितनुते नृणाम् ।३३ मरीचहोमान्मरणं रिपुराप्नोति सर्वथा । क्षुद्रादिचोरभूताद्यान्ध्यात्वा देवीं विनाशयेत् । ३४ तारो दुर्गेयुं रक्तमन्त्यं ठान्तं सलोचनम् । द्विष्टान्ता जयदुर्गेयं विद्या वेद्या दशाक्षरी । ३५ आगे आयुधों का—शङ्ख चक्र का असि और खेटकों का—बाण— बाणासन—शूल—कपाल का यादि से क्रम से यजन करे ।३०। फिर लोक पालों का पूजन करे उनके आगे उनके अस्त्रों का यजन करना चाहिए । इस तरह से करने वाला साधक तिलों के होम से नरों और नर पतियों को भी अपने वश में कर लिया करता है ।३१। मन्त्रधारी सिद्धार्थों (श्वेत सर्षपों) से हवन कर के रोग ने तत्क्षण में ही मुक्त हो जाया करता है । पद्मों से हवन करके शत्रुओं पर विजय पाता है और दूर्वाओं से होम करके शान्ति को पाता है ।३२। पलाश के पुष्पों के द्वारा होम करके पुष्टि का लाभ किया करता है और धान्यों से हवन करके धान्य श्री को प्राप्त करता है । कौए के पक्षों से होम करने वाला मनुष्यों में द्वेषका विस्तार करता है ।३३। मिर्चों के होम से शत्रु सर्वथा