शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१८ [ प्रथम पटल वाली है ।५३-५४। यह देवी सब देवों से परिपूर्ण है और सब मन्त्रों से पूर्ण शिवा है। सब तत्त्वों से परिपूर्ण साक्षात् सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतरा और विभु है ।५५। त्रिधामजननी देवी शब्दब्रह्मस्वरूपिणी । द्विचत्वारिंशद्वर्णा मा पञ्चाशद्वर्णरूपिणी । ५६ गुणिता सर्वगात्रेषु (ण) कुण्डली परदेवता । विश्वात्मना प्रबुद्धा सा सूते मन्त्रमय जगत् ।५७ एकधा गुणिता शक्तिः सर्वविश्वप्रवर्त्तिनी । वेदादिबीजं श्रीबीजं शक्तिबीजं मनोभवम् ।' ८ प्रासादं तुम्बुरु पिण्डं (बीज) चिन्तारत्नं गणेश्वरम् । मार्त्तण्डभैरवं दौर्गं नारसिंहं वराहजम् ।।५६ वासुदेवं हयग्रीवं बीजं श्रीपुरुषोत्तमम् । अन्यान्यपि च बीजानि तदात्पादयति ध्रुवम् ।।६० यह त्रिधाम जननी है और यही देवी शब्द ब्रह्म के स्वरूप वाली है। बयालीस वर्णों के रूप वाली तथा पचास वर्णों के स्वरूप में रहने वाली है। सब गात्रों में गुणिता यह कुण्डली पर देवता है। विश्वात्मा के द्वारा प्रबुद्ध की गयी वह मन्त्रमय जगत् को प्रसूत किया करती है ।५६। ५७। एक प्रकार से गुणिता शक्ति सम्पूर्ण विश्व के प्रवर्त्तन करने वाली है। वेदादि बीज को-श्री बीज को-शक्ति बीज को-मनोभव को-प्रसाद- तुम्बुरुपिण्ड को-चिन्तारत्न को-गणेश्वर को-मार्त्तण्ड भैरव, दौर्ग, नारा- सिंह-वराहज वासुदेव-हयग्रीव बीज को-श्रीपुरुषोत्तम को और अन्यान्य बीजों को भी उस समय वे उत्पादित निश्चित रूप से किया करती है ।५८-६०। यदा भवति सा संवित् द्विगुणीकृतविग्रहा । हंसवर्णौ परात्मानौ शब्दार्थौ वासरक्षये ।।६१ सृजत्येषा परा देवी तदा प्रकृतिपूरुषौ । यद्यदन्यज्जगत्यस्यः युग्मं तत्तदजायत ।।६२