भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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दशम पटल ] [ २२३ अष्टोत्तरसहस्रं यस्तिलैस्त्रिमधुराप्लुतैः । नित्यं तज्जुहुयात्तस्य शक्तिः स्यादतिमानुषी ।५२ अष्टोत्तरशता नित्यं सर्पिषा जुहुयान्नरः । वाञ्छितां वत्सरादर्वाक् प्राप्नुयान्महतीं श्रियम् ।५३ दूर्वाहोमो भवेन्नृन्वाञ्छितसिद्धिदः । छुरिकाद्यानि शस्त्राणि जप्तानि मनुनाऽमुना । संपाताज्यविलिप्तानि वितरन्ति जयश्रियम् ।५४ अश्वत्थार्कसमिद्भिर्वा तिलैस्त्रिमधुरोक्षितैः । होमो वशयति क्षिप्रमीप्सितान्मन्त्रिणोनरान् ।५५ उद्यदायुधहस्तां तां देवी कालघनप्रभाम् ध्यात्वाऽऽत्त्मानं जपेन्मन्त्रं स्पृष्ट्वाऽऽर्तं मुञ्चति ग्रहः ।५६ सप्तमी नन्दिनी कही गयी है—दूसरी महायोगेश्वरी है। दलो के अग्र भागों में उनके अस्त्रों का यजन करना चाहिए। शङ्ख, चक्र, असि, गदा, इषुचाप, शूल और पाश का यजन करे। इसके पीछे दिक्पालों का अर्चन करना चाहिए। इस रीति से जप आदि के द्वारा सिद्ध होता है और फिर अपना ईप्सित कर्म करना चाहिए ।५०।५१। जो एक सहस्र आठ बार मधुर से अक्त तिलों के द्वारा नित्य हवन करता है उसकी अतिमानषी शक्ति हो जाती है ।५२। जो मनुष्य अष्टो- त्तर शत घृत से आहुतियाँ देता है वह एक वर्ष से पहिले ही अपनी वाञ्छित महती श्री प्राप्ति किया करता है ।५३। दूर्वा से किया हुआ होम मनुष्यों के लिए सब वाञ्छितों की सिद्धि का प्रदाता होता है। इस मन्त्र के द्वारा अभिमन्त्रित छुरिका आदि शस्त्र सम्पा- ताज्य से विलिप्त किये हुए जय श्री को वितरित किया करते हैं ।५४। पीपल और आक की समिधाओं से अथवा तीनों मधुरों में उक्षित तिलों से किया हुआ होम शीघ्र ही ईक्षित मन्त्रियों को और नरों को अपने वश कर लिया करता है ।५५। उठाये हुए आयुध के हाथ में ग्रहण करती हुई—काले मेघ के तुल्य प्रभा से समन्वित उस देवी का ध्यान