भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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२३६ ] [ श्रीशारदा तिलक वालों को राज्य के देने वाला है और जो वश्य के इच्छुक हैं उनको वश्य करने वाला है ।१२७। सुत के चाहने वालों सुतप्रदाता होता है और रोगियों के रोग की शान्ति का देने वाला है। इसके विषय में बहुत कथन करने से लाभ है यही कहा जाता है कि यह मन्त्र कामना के देने वाली मणि ही है ।१२८।

एकादश पटल ॥ गणपति प्रकरण ॥ अथ वक्ष्ये गणपतेर्मन्त्रान्सर्वार्थसिद्धिदान् । याल्लँब्ध्वा मानवा नित्यं साधयन्ति मनोरथान् ।१ पंचान्तकः शशिधरं बीजं गणेपतेर्विदुः । गणकः स्यान्मुनिश्चन्दोनिचि॒त् विघ्नोऽस्य देवता । षड् दीर्घभाजा बीजेन कुर्यादङ्गाक्रियां मनोः ।२ सिन्दूराभं त्रिनेत्रं पृथुतरजठरं हस्तवद्भिर्द धानम् । दन्तं पाशाङ् कुशेट्टान्यरुकरविलसद्बीजपूराभिरामम् ।३ बालेन्दुद्योतिमौलिं करिपति-दनं दानपूरार्द्र गण्डं । भोगीन्दावद्धभूषं भजत गणपति रक्तावस्त्राङ्गरागम् ॥४ वेदलक्षं जपेन्मत्रं दश श जुहुयात्ततः । मोदकैः पृथुकैर्लाजैः जक्तुभिश्चेक्ष पर्वभिः ।५ नारिकेरैस्तिलैः शुद्धैः सुपक्कैः कदलीफलैः । अष्टद्रव्याणि विघ्नस्व कथित्रानि मनीषिभिः ।६ तीव्रादिशक्तिभिर्युक्ते पीठे विघ्नेश्वर यजेत् । { तीव्राख्या ज्वलिनी नन्दा भोगदा कामरूपिणी ।७ } इसके अनन्तर सब अर्थों की सिद्धियोंके देने वाले गणपति के मन्त्रों