भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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२० [ प्रथम पटल वह शुभा तीन धाम है तीन वेद हैं और तीन वर्ण है। देवी तीन पुष्कर-स्वर और ब्रह्मादिक का भी त्रय है ।६६। तीन अग्नियां हैं- तीन काल हैं, शक्तिका भी त्रय है और तीन वृत्तियाँ हैं। तीन नाड़ियां हैं तीन वर्ग हैं, वह ऐसी है और जो जोभी अन्य है वह सब तीनप्रकार का ही है ।६७। चार प्रकार से गुणित शाम्भवी कल्याण देने वाली है । उस समय में पद्मिनी-बन्धु का चार अक्षर वाला करती है। यह मन्त्रान्तर में कथित प्रणव-माया और हंस वर्णोंके स्वरूप वाला है ।६८। महादेवी के चार वर्ण है और रवी के तत्व भी चार होते हैं। चार ही सागर हैं और अन्तःकरण भी मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त चार होते हैं । सूक्ष्म आदि चार भाव है और भगवान् विष्णु की मूर्तियाँ भी चार ही होती हैं। गणेश आदि का चतुष्टय होता है और आत्मादि भी चार हैं ।६६-७०। तथापूजादिकं पीठं धर्मादीनां चतुष्टयम् । दमकादीन् गजान् देवा यद्यदन्यच्चतुष्टयम् ।७१ पञ्चधा गुणिता पत्नी शम्भोः सर्वार्थदायिनी । त्रिपुरा पञ्चकूटं सा तस्याः पञ्चाक्षरद्वयम् ।७२ पञ्चरत्नं महादेव्याः सर्वकामफलप्रदम् । पञ्चाक्षरं महेशस्य पञ्चवर्णं गरुत्मनः ।७३ सम्मोहनान्पञ्चकामान्बाणान्पञ्च सुरद्र मान् । पञ्चप्राणादिकान् वायून् पंच वर्णान् महेशितुः ।७४ मूर्त्तीः पंच, कलाः पंच पंच ब्रह्म ऋचः क्रमात् । सृजत्येषा परा शक्तिर्वेदवेदार्थरूपिणी ।७५ उसी प्रकार से पूजादिक पीठ और धर्मादिका भी चतुष्टय होता है । दमकादि-गज और देव जो जो भी अन्य हैं सबका चतुष्टय ही होता है। ।७१। सब अर्थों की देने वाली शम्भु की पत्नी पाँच प्रकार से गुणित होती हैं। वह त्रिपुरा पञ्चकूट है और उसके पञ्चाक्षर द्वय है। महा- देवी के पाँच रत्न हैं जो सब कामनाओं के फल के प्रदाता हैं। महेश