शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंश्री शारदा तिलक ] २१ के पांच अक्षर हैं और गुह्यमान के पांच वर्ण होते हैं ।७२-७३। पाँच काम वाले समोहन हैं-पाँच वाण है और सुद्रुम भी पाँच होते हैं। पाँच प्राण आदिक वायु है और महेशिला के पाँच वर्ण हैं। मूर्त्तियाँ पाँच हैं-कलाएं पाँच हैं-पाँच ब्रह्म हैं और क्रम से पाँच ऋचाएं हैं। यह वेद और वेदार्थ के रूप वाली परा शक्ति सृजन किया करती है। ।७४-७५। षोढा सा गुणिता देवी धत्ते मन्त्रं षडक्षरम् । षट्कूटं त्रिपुरामन्त्र गाणपत्यं षडक्षरम् ।७६ षडक्षरं महेशस्य श्रीकृष्णस्य षडक्षरम् । षडक्षरं हिमरुचेर्नारसिंह षडक्षरम् ।७७ ऋतून् बसन्तमुख्यांश्च (१) आमोदादीन् गणाधिपान् । कोशानूर्मीन् रसान् शक्तीः शाकिन्याद्याः षडध्यनः ।७८ यन्त्रं षड्गुणितं शक्तेः षडाधारानजीजनत् । षड्विधं यज्जगत्यस्मिन् सर्वं तत्परमेश्वरी ।७६ सप्तधा गृणिता नित्या शङ्करार्द्धशरीरिणी । सप्तार्ण त्रिपुरामन्त्रं सप्तवर्णं विनायकम् ।८० छै प्रकार से गुणित शक्ति देवी षडक्षरों वाले मन्त्र को धारण करती है। त्रिपुरा का मन्त्र षटकूट है और गाणपत्य मन्त्रभी छै अक्षरों वाला होता है ।७६। महेश का मन्त्र छै अक्षरो वाला है और श्रीकृष्ण का मन्त्र भी षट् अक्षरोंसे युक्त होता है। हिमरुचि का मन्त्र छै अक्षरों वाला है तथा नरसिंह का मन्त्र भी षडक्षर है ।७७। बसन्त जिनमें प्रमुख है वे ऋतुएं छै हैं और आमोद आदि गणाधिप छै होते हैं। कोश-ऊर्मियाँ-शक्तियाँ- रसऔर शाकिनी आदिसब छै ही हैं। शक्ति का यन्त्र षड्गुणित है औरछै आधारों की उत्पन्न किया है। इस जगत् में जोभी है वह सब छै प्रकार काही हैं, ऐसीवह परमेश्वरी है ।७८-७६। अब शङ्कर के अर्ध शरीर वाली नित्या देवी सात प्रकार से गुणित