भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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२२ [ प्रथम पटल होती हैं । त्रिपुरा का मन्त्र सात वर्णोंसे संयुक्त है और सात वर्णों वाला विनायक मन्त्र है ।८०। सप्तकं व्याहृतीनां सा सप्तवर्णं तुदर्शनम् । लोकान् गिरीन् स्वरान् धातून् मुनीन् द्वीपान् ग्रहानपि ।८१ समिधः सप्त संख्याताः सप्त जिह्वा हविर्भुजः । अन्यत्सप्तविधं यद्यत् तदस्याः समजायत ।८२ अष्टधा गुणिता शक्तिः शैवमष्टाक्षरद्वयम् । विष्णोः श्रीकरनामानं मन्त्रमष्टाक्षरं परम् । ३ अष्टाक्षरं हरेः शक्तेरष्टारयुगलं परम् । भानोरष्ठाक्षरं दौर्गमष्टार्ण परमात्मनः ।८४ अष्टार्णं नीलकण्ठस्य वासुदेवात्मकं मनुम् । यन्त्रं कामार्गलं दिव्य देवीयन्त्रं घटार्गलम् ।८५ वह व्याहृतियों का सप्तक है और सात वर्णों वाला सुदर्शन मन्त्र होता है । सात ही लोक है - पर्वत सात हैं-स्वर सात हैं-धातुएँ सात हैं-मुनि सात हैं—द्वीप सात हैं और ग्रह भी सात हैं ।८१। सात समिधाएं कही गई हैं और अग्नि की सात जिह्वाएं होती हैं । अन्य जो-जो भी सात प्रकार वाले हैं वे इसी से उत्पन्न हुए हैं ।८२। शक्ति आठ प्रकार से गुणित हुई है और शिव का भी अष्टाक्षर द्वय होता है । भगवान् विष्णु का श्रीसुकर नाम वाला मन्त्र आठ अक्षरों वाला श्रेष्ठ होता है । हरि का अष्टाक्षरों वाला मन्त्र होता है और शक्ति का अष्टा- क्षर युगल होता है, जो परमश्रेष्ठ है । भानुका आठ अक्षरसे संयुक्तमंत्र होता है-दुर्गा का परमात्मा नीलकण्ठ का तथा वासुदेव का भी आठ आठ अक्षरों वाला मन्त्र होता है । कामार्गल दिव्य मन्त्र है और देवी का यन्त्र घटार्गल होता है ।८३-८५। गन्धाष्टकं शुभं देवी देवानां हृदयङ्गमम् । ब्राह्मयाद्या भैरवान् सर्वान् मूर्त्तीराशा वसून्पि ।८६

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