शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२६० ] [ श्रीशारदा तिलक जिससे सब सम्पदाओं की प्राप्ति होती है ।१३२। अब ध्यान कहा जाता हैं-सत्पुरुष आदि में होने वाले ॐ को क्रम से कहते हैं जिसका श्रुतियों की वाणियाँ भी ग्रहण किया करती हैं । देवगणोंके द्वारा जिसके चरणों में नमस्कार किया गया है ओर जो अर्ध चन्द्र के द्वारा भूषित हैं, उन गजानन प्रभु का भजन करता हूं ।१३३। पादारविन्दाच्च॑न..त्पराणां संसारदावानलभङ्गदक्षम् । निरन्तरं निगतदानतोयैस्तं नौमि विघ्नेश्वरमम्बुदाभम् ।१३४ कृताङ्गरागं नवकुङ्कुमेन मत्तालिमालां मेदाङ्कलग्नाम् । निवारयंतं निजकर्णतालैः काविस्मरेत्पुत्रमनङ्गशत्रोः ।१३५ शंभोजंटाजूटनिवासिगङ्गाजल समादाय कराम्बजेन । लीलाभिराराच्चिवमर्चयन्तं गजाननं भक्तियुता भजन्ति ।१३६ कुमारभक्तौ पुनरात्महेतोः पयोधरौ पर्वतराजपुत्र्याः । प्रक्षालयन्तं करसीकरेण मौग्ध्येन तं नागमुखं भजामि ।१३७ त्वया समुद्धृत्य गजास्य हस्तं ये सोकराः पुष्कररन्ध्रमुक्ताः । व्योमाङ्गणे ते विचरन्ति ताराः कालात्मना मौक्तिकतुल्यभासः ।३८ क्रीडारते वारिनिधौ गजास्ये वेलामतिक्रामति वारिपूरे । कल्पावसानं प्रविचिन्त्य देवाः कैलासनाथ स्तुतिभिः स्तुवन्ति ।१३६ नागानने नाग हुतोत्तरीये क्रीडारते देवकुमार संघैः । त्वयि क्षणं कालगति विहाय तौ प्राप्तुः कन्दुकतामिनेन्द ।१४० चरणार विन्दों के अभ्यर्चन न परायण भक्तों के संसार दावानलके भङ्ग करने में दक्ष है, जो मेघ की आभा वाले हैं और निरन्तर निकलने हुये मद के जलके समूह से समन्वित है उन भगवान् विघ्नेश्वर के लिएमैं प्रणाम करता हूँ ।१३४। नूतन कुंकुम के द्वारा अङ्गराग की करने वाले, मद के कर्दम में लगे हुये मद मस्त भ्रमरों की पक्तियों को अपने कानों के तालों के द्वारा निवारण करने वाले अनङ्ग के शत्रु भगवान् शिव के