शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 285, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वादश पटल ] [ २८५ कृत्तिकायां प्रतिपदि शालिहोमो धनप्रदः । दध्ना शमोसद्भिर्वा प्रतिपत्सु भवेद्धनम् ।१२५ इष्टावाप्तिर्भवेदाज्यैः पद्मैग्राममवाप्नुयात् । तिलैर्ज्योतिष्मतीभूतैरिरिपुराज्यं जयेन्नृपः । १२६ अश्वत्थसमिधोमेषीघृताक्ता जुहुयान्नरः । कन्यामिष्टामवाप्नोति सापि तं वरममाप्नुयात् । १२७ शुद्धाज्येन कृतो होमो ज्वरनाशकरः स्मृतः । सप्ताहं जुहुयान्मन्त्री बन्धूककुसुमैः शुभैः । १२८ साग्रं सहस्रमचिरान्महतीं श्रियमाप्नुयात् (मश्नुते) । मासं क्षीरेण गव्येन क्षीराहारी जितेन्द्रियः । १२६ सहस्रं जुहुयान्मन्त्री सम्पदामाश्रयोभवेत् । १३० वह मनुष्य अपमृत्यु का भय-रोग-कृत्या दारिद्रय से होने वाले कष्टों को जीतकर तेजस्वी सो वर्ष तक जीवित रहा करता है । १२४। कृत्तिका में प्रतिपदा में शाधितयों के होम जल के प्रदान करने वाला होता है । दधि से अथवा शमी की समिधाओं से प्रतिपदाओं में धन होता है ।१२३। आज्य से हवन करके अभीष्ट को प्राप्ति किया करता है और पद्मों से होम करके ग्राम को प्राप्त किया करता है । नित्य तिलों से और ज्योतिष्मती से हवन करने से शत्रु के राज्य को जीत लेता है । १२६। मनुष्य अश्वत्थ की समिधाओं से भेड़ के घृत में अक्त करके होम करे । इससे अभीष्ट कन्या को पाता है और कन्या भी अभी प्सित वरको प्राप्त कर लिया करती है । १२७। शुद्धघृत से किया हुआ ज्वर का नाश करने वाला कहा गया है । मन्त्रधारी शुभ बन्धूक के पुष्पों से एक सप्ताह तक होम करे । १२८। एक सहस्र आठ बार हवन करे तो महती (बहुत बड़ी) श्री को प्राप्त कर लेता है । एक मास तक गव्यक्षीर से क्षीर के आहार वाला जितेन्द्रिय रहे और मन्त्रधारी एक सहस्र का होम करे तो वह सम्पदाओं का आश्रय होता है ।१२६।१३०।