भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 287, कुल 511 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 287

दश पटल ] [ २८७ वर्ष तक होम करने वाले के पास इन्द्र के द्वारा वाञ्छित लक्ष्मी आती है ।१३४-१३५। पय में अक्त अमृता के खन्डों से सात वार में हवन करे और मन्त्र का ज्ञाता पुरुष जितेन्द्रिय रहकर तीन सहस्र प्रतिदिन आहुतियाँ देवें तो वह पुरुष कृत्या के द्रोह-ज्वर-उन्माद रोगों पर विजय पाकर तेज से भास्कर के समान होकर निरन्तर सौ वर्ष तक जीता है । ।१३६-१३७। करवीर-जपा-विल्व-पलाश और राजवृक्षों के प्रसूनों से तीन मधुरों में अक्त करके मन्त्रधारी प्रतिपद के प्रति होम करे तो एक वर्ष में अभीप्सित से भी अधिक बड़ी लक्ष्मी को प्राप्त किया करता है । १३८-१३६। आदाय तण्डुलं प्रस्थं निर्मलं साधुशोधितम् । गोदुग्धेन हविः कृत्वा केवलं तेन कल्पयेत् ।१४० आज्याक्तं तत्समादाय पूजिते हव्यवाहने । गन्धपुष्पादिभिः सम्यग्जपित्वाष्टोत्तरं शतम् ।१४१ जुहुयात्प्रतिपत्स्वग्निं ध्यात्वा तुरगविग्रहम् । जायते वत्सरादवग्लक्ष्मीस्त्रैलोक्यमोहिनी ।१४२ मन्त्रेणानेन सञ्जप्तां वचां खादेद्दिनागमे । भारती निवसेत्तस्य मुखाम्भोजेऽतिनिश्चिला ।१४३ अष्टोत्तरशतं जप्तं जलं प्रातः पिबेन्नरः । जठराग्निर्ज्वलेत्तस्य घृतेनेव हुताशनः ।१४४ भली-भाँति शोधित निर्मल तण्डुल प्रस्थ का समादान करके गायके दूध से केवल हवि बनाकर के उससे कल्पित करे आज्य को लाकर गन्ध पुष्पादि के द्वारा पूजित हव्य वाहन में भली-भाँति एक सौ आठ बार जप करके प्रतिपदाओं में तुरग (अश्व) के विग्रह वाले अग्नि का ध्यान करके होम करे तो उसके समीप में एक वर्ष के पहले ही तीनों लोकों को मोहन करने वाली लक्ष्मी हो जाया करती है ।१४०-१४२। इस मन्त्र के द्वारा अभिमन्त्रित वच को दिन के आगम में अर्थात् प्रातः काल में भक्षण करे तो उसके मुख में अतीव निश्चला होकर भारती