भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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३३६ ] [ श्रीशारदा तिलक गुरुं च धनधान्याद्यैर्नत्वा सम्प्रीणयेत्तदा । सर्वरोगहरः प्रोक्तः कृत्याद्रोहादिनाशनः ।११५ अपमृत्युहरः पुंसां विधिरेष प्रकीर्तितः । पञ्चगव्यैः कषायैर्वा क्षीरभूरुहसम्भवैः ।११६ पूरितैः कलशैर्जप्तैः कृतसम्पातसंयुतैः । अभिषिञ्चेदग्रहाविष्टमभिचारातुरन्ततः ।११७ स्वस्थो भवति शीघ्रेण विधानेनामुना नरः । भानुवारेऽभिषेकस्य विधानेन सुसाधितैः ।११८ सलिलैःस्नापयेन्नारीं सुखप्रसवकाङ्क्षिणीम् । सप्तवाराभिषेकेण सर्वे नश्यन्त्युपद्रवाः ।११९ धुले हुये वस्त्रों से संयुत तथा विशुद्ध अङ्गों वाले का स्पर्श करके भली रीति से मन्त्रका जप करे । पूर्व आदि दिशाओंमें अग्नि को संस्था- पना करके विधान के ज्ञाता को चाहिये कि वह परम श्रेष्ठ ब्राह्मणों से सन्दिष्ट द्रव्यों के द्वारा होम करावे । यजमान अपनी शक्ति से दक्षिणाके द्वारा उन ब्राह्मणों को सन्तुष्ट करे।११४। उस अवसर पर गुरुदेव को प्रणाम करके धन धान्यादि से प्रसन्न करे । यह विधान समस्त रोगों के हरण करने वाला तथा कृत्यादि के देह का विनाश करने वाला है ।११५। यह विधि पुरुषों का अपमृत्यु के हवन करने वाली कीर्तित की गयी है । पञ्चगव्य से अथवा कषायों से जो क्षीर वाले वृक्षों से किये गये हों इन कलशों को पूरित जप के साथ करे और सम्पात से सम- न्वित करे । फिर इनके द्वारा जो ग्रहों से आविष्ट हो तथा अभिचार से आतुर हो उसका अभिषिंचन करना चाहिये ।११६-११७। मनुष्य इस विधान के करने पर शीघ्र ही स्वस्थ हो जाया करता है । रविवार में अभिषेक के विधान के द्वारा सुसाधित जल से नारी का स्मरण करावे इससे सुख पूर्वक प्रसव सम्पन्न हो जाता है। सातवारों में यह अभिषेक करने से सभी उपद्रव नष्ट हो जाया करते हैं ।११८-११९।