शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 361, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ेंपंचदश पटल ] [ ३६१ ढाक वृक्ष के तख्ते पर लिखकर उसे साधु साधित करे। इस मन्त्र को गौओं के स्थान में गाड़ देवे तो इससे गौओं की वृद्धि सदा होती है। १ १७। श्लोक चतुः षष्टदेष भूर्ज शिवादि देत्यादि लिखेत्क्रमेण । तत्सर्वतोभद्रमिति प्रसिद्ध यन्त्रः श्रीविजयप्रदायि । ११८ फलके खादिरे कॢप्तं गवां गोष्ठे निवेशितम् । रक्षाकृच्चौरमारिघ्नं सवत्सानां गवां हितम् ।११६ क्षोरगोपवगीरक्षोरक्षमाक्षपक्ष र । योमानोनगनोमागोपक्षक्षक्षगक्षाप ।१२० ब्रह्मा भूम्या समासीनः शान्तिबिन्दुसमन्वितः । बीज मनोभुवः प्रोक्तं जगत्त्रितयमोहनम् । १२१ ऋषिस्सम्मोहनः प्रोक्तो गायत्रं छन्द ईरितम् । सर्वसम्मोहनः साक्षाद्देवता मकरध्वजः । बीजेन दीर्घयुक्तेन षड् ङ्गविधिरोरीतः । १२२ अब अन्य मन्त्र बताया जाता है-भोज पत्र में चौंसठ पदों में श्लोक को लिखे और क्रमसे शिवादि दैत्यादि लिखे । 'यह सर्वतो भद्र'- इस नाम से प्रसिद्ध है। यह यन्त्र यश, श्री और विजय के प्रदान करने वाला होता है ।११८। खादिर वृक्ष के तख्ते पर लिख कर गायों के गोष्ठ में निवेशित करे तो यह चोर आदि के हनन करने वाला तथा रक्षाप्रद होता है और वत्सों के सहित गौओं का हित करने वाला है ।११६। अक्षर वाला एक काम मन्त्र कहा जाता है—ब्रह्मा, कः, भूमि, लः, इस पर आसीन शांति-ई, विन्दु, अनुस्वार, इससे क्लीं हुआ । यह कामदेव का बीज कहा गया है। जो तीनों जगतोंका मोहने वाला होता है । १२० । १२१। इस मन्त्र का ऋषि सम्मोहन कहा गया है तथा इसका छन्द गायत्र है । इस मन्त्र का देवता साक्षात् सर्व सम्मोहन मकर ध्वज होता है । दीर्घ से युक्त बीजके द्वारा इसके षडङ्गों की विधि कही गयी है ।१२२।