शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३६२ ] [ श्रीशारदा तिलफ तपा (वा) रुणं नत्नविभूषणाढ्यं मीनध्वजं चारुकृताङ्गरागम् । कराम्बुजैरङ्कु शमिक्षु चापं पुष्पास्त्रपाशौ दधत भजामि ।२३ लक्षत्रयं जपेन्शं मधुरत्रयसंयुतैः । पुष्पैः किंशुकजैः फुल्लैर्जुहुयात्तद्दशांशतः । १२४ वक्ष्यमाणे यजेत्पीठे विधिना मकरध्वजम् । मोहिनी क्षोभिणी त्रासीस्तम्भन्याकर्षिणो पुनः ।१२५ द्राविण्युन्मादिनीक्लिन्नाक्लेदिन्यः पीठशक्तयः । बीजाद्यमासनं दत्त्वा मूर्त्ति मूलेन कल्पयेत् । १२६ अस्यां सम्यग्यजेद्देवं वक्ष्यमाणेन वर्त्मना । इष्ट्वाऽङ्गावरणं पूर्वं मध्ये दिक्षा यजेच्छरान् ।१२७ ड्राडाद्यं शोषणं पूर्वं द्रीडाद्यं मोहनं ततः । गंदीपनाख्यं क्लीमाद्यं क्लुमाद्यं तापनं ततः ।१२८ सगन्तंभृगुणा भूयो मादनं पञ्चमन्ततः । प्रणामबाणहृप्ताब्जा ध्येयास्ना बाणदेवताः ।१२६ अब ध्यान बताया जाता है-क्रान्तिसे युक्त अरुणरतनों के-भूषणोंसे समन्वित-मीन ध्वजा वाले-सुन्दर अङ्ग राग किये हुए-करकमलों में अंकुश इक्षुचाप-पुष्पास्त्र और पाश को धारण करने वाले का मैं भजन करता हूँ ।१२१। इस मन्त्र का तीन लाख जप करना चाहिए । और जप का दशांश भाग तीनों मधुरों में संयुक्त ढाक के पुष्पों से होम करें । आप बताये जाने वाले पीठ पर विधि के साथ मकरध्वज का अर्चन करना चाहिए । अब पीठ की शक्तियाँ बतलायी जाती हैं— मोहिनी— क्षोभिणी— स्तम्भिनी—आकर्षिणी—द्राविणी—उन्मादिनी— क्लिन्न—क्लेदिनी—ये पीठ की शक्तियाँ हैं बीजाद्य आसन देकर मूल मन्त्र के द्वारा मूर्त्ति की कल्पना करनी चाहिए । १२६-१२६। इस मूर्ति में आगे कहे जाने वाले मार्ग से भली भाँति देव का यजन करना चाहिए । पूर्व में अङ्गावरण का अर्चन करके मध्य में दिशाओं में शरों का अर्चन करना चाहिए ।१२७। पूर्व में डडाद्य—ड्रीडद्य—मोहन —