शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 363, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ेंचतुर्दश पटल ] [ ३६३ दीपन-क्लीमाद्य-तापन-सर्गान्तभृगु अर्थात् सः, फिरमादन पाँचवां होता है। एक हाथ से प्रणाम और दूसरेसे अब्ज धारण करने वाले बाथ युक्त देवता है जिनका ध्यान करना चाहिए। वहां पर मध्य में क्रम के अनु- सार शक्तियों का पूजन करें। २८ १२६। सम्पूज्यास्तत्र मध्ययेषु शक्तयोऽष्टौ यथाक्रमम् । अनङ्गरूपान्याऽनङ्गमदनानङ्गमन्मथा ।।१३० अनङ्गकुसुमा पश्चादनङ्गमदुरा । अनंगशिशिरान ङ्गमेखलानंगदीपिका ।।१३१ लीलाकमलधारिण्यः स्मरवक्त्राः सुशोभितः ।।१३२ वह्निः षोडशपत्रेषु पूज्याः षोडश शक्तयः । युवतिविप्रलम्भान्या ज्योस्ना शुभ्रर्मदद्रवा ।।१३३ सुरता वारुणी लोभा कान्ति सौदामिनी पुनः । कामच्छत्रा चन्द्ररेखा शुकी स्यान्मदना पुनः ।१३४ ज्योतिर्मायावनी ता स्युः कहलारविलसत्कराः । स्मेरवक्त्रा युवतयो मदविभ्रममन्थराः ।१३५ उन शक्तियों के नाम बताये जाते हैं-अनङ्गरूपा-अनङ्गमदना- अनङ्गमन्मथा-अनङ्गकुसुमा-अनङ्गमदनातुरा-अनङ्गशिशिरा-अन- ङ्गमेखला-अनङ्गदीपिका ये हैं ।१३०-१३१। ये सब लीला कमलों के धारण करने वाली हैं, इनके मुख पर मन्द मुस्कान रहती है ओर ये सुशोभित हैं ।१३२। बाहर सोलह पत्रों में इन षोडश शक्तियों का पूजन करना चाहिए । उनके शुभ नामों का, परिगठन किया जाता है- युवतिविप्रलम्भा, ज्योत्स्ना, शुभ्र, मदद्रवा, सुरता, वारुणी, लोभा, कान्ति, सौदामिनी, कामच्छत्रा, चन्द्ररेखा, शुक्री, मदना, ज्योति, मायावती, ये इनके नाम हैं । ये सब कल्हार के शोभित करने वाली है इनका मुख स्मित से युक्त है-ये सब युवतियाँ है और मद के विभ्रमों से मन्थरा है ।१३३-१३५। दलाग्रेषु पुनः पूज्याः स्मरस्य परिचारिकाः । शोकमोही विलासोऽन्यो विभ्रमो मदनातुरः ।१३६