भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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३६ ] [ श्री शारदा तिलक मन्दस्मित से समन्वित है। इनके अङ्ग विद्युल्लता के समान हैं और ये पंकज तथा अभय दान को करकमलों के द्वारा वहन करने वाली है। ।५६। मातृका वर्णों के भेदों से ही सब मन्त्र समुत्पन्न हुए हैं। मन्त्र विद्या के द्वारा मन्त्रों की जातियां तीन प्रकार की है ।५७। मन्त्रों के देवता पुमान् होते हैं और विद्याएं स्त्रीदेवता वाली कहींगयी हैं। सभी मन्त्र पुमान् - नपुंसक और स्त्री संज्ञा वाले कहे गये हैं ।५८। जिन मन्त्रों के अन्त में हुँफट् होता है वे मन्त्र पुमान् कहे गये हैं और जिन के अन्त में दो ठकार अर्थात् ठ-ठ होने पर वे मन्त्र स्त्री संज्ञा वाले माने गये हैं। जो मन्त्र नपुंसक होते हैं उसके अन्त में नमः—यह होता है। इस रीति से मन्त्र तीन प्रकार वाले होते हैं ।५६। वे तोनों प्रकार के मन्त्र वश्य कर्म-शान्ति कर्म और अभिचार में प्रशस्त होते हैं। मन्त्र अग्नीषोम के स्वरूप वाले जानने चाहिए, क्रूर और सौम्य कर्मों में ।६०। कर्मणोर्वहिनतारान्त्यवियत्प्रायाः समोरिताः । आग्नेया मनवः सौम्या भूयिष्टेन्द्वमृताक्षराः ।६१ आग्नेयाः संप्रबुध्यन्ते प्राणे चरति दक्षिणे । भागेऽन्यस्मिन् स्थिते प्राणे सौम्या बोधं प्रयान्ति च ।६२ नाडीद्वय गते प्राणे सर्वे बोधं प्रयान्ति च । प्रयच्छन्ति फलं सर्वे प्रवृद्धा मन्त्रिणां सदा ।६३ छिन्नादिदृष्टा ये (१) मन्त्राः पालयन्ति न साधकम् । छिन्नो रुद्धः शक्तिहीनः पराङ् मुख उदीरितः ।६४ बधिरो नेत्रहीनश्च कीलित स्तम्भित स्तथा । दग्धस्त्रस्तश्च भीतश्च मलिनश्च तिरस्कृतः ।६५ जिनके अन्त में वहिनतार और वियत् प्राया होते हैं वे ही बतलाये गये हैं अर्थात् क्रूर और सौम्यकर्मोंमें उनका ही प्रयोग करना चाहिए। आग्नेय मन्त्र सौम्य होते हैं जिसमें विशेष करके अधिकता में इन्दु-अमृत अक्षर होते हैं ।६१। दक्षिण में प्राण के चरण करने पर आग्नेय मन्त्र