भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 433, कुल 511 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 433

अष्टादश पटल ] { ४३३ वेतसों की श्रेष्ठ समिधाओं के द्वारा हवन करे ।८४। धनधान्य आदि की सम्पदा के लिए अन्न के द्वारा ही नित्य होम करना चाहिए । मन्त्रधारी को चाहिए कि वश्य करने के लिए तीन दिन पर्यन्त मधु से होम करे ।८५। रोगोक्तौषधहोमेन रोमा नश्यन्ति तत्क्षणात् । कृत्याद्रोहे ग्रहे द्रोहे भूतापस्मारसम्भवं ।८६ व्याघ्राजिने समासीनोजुहुयादयुतं तिलैः । भतादयः पलायन्ते नेक्षन्ते तां दिशं भयात् ।८७ कृष्णाष्टमी समारभ्य यावत् स्यात्तच्चतुर्दशो । तिलैस्तण्डुलसम्मिश्रैर्मधुरत्रयलोलितैः ।८८ त्रिसहस्रं प्रतिदिनं जुहुयात्संस्कृतेऽनले । बटुकेश्वरमभ्यर्च्य भक्ष्यभोज्यफलान्वितम् ।८६ नित्यं निवेद्य नैवेद्यं मध्यरात्रे बलि हरेत् । एवं जपित्वा प्रयत: सहस्राण्येकविंशतिम् ।६० समाप्तिदिवसे नात्रावज हत्वा बलि हरेत् । ततः कारयिता राजा तोषयेत्साधकं धनै ।६१ विधिनानेन सन्तुष्टो बटुकेशः प्रयच्छति । तेजो बल यशः पुत्रान्कान्ति लक्ष्मीमरोगताम् ।६२ रोग में कही हुई औषध के होम करने से रोग उसी क्षण में नष्ट हो जाया करते हैं । कृत्या के द्रोह में-ग्रहों के द्रोह में-भूतों और अपस्मार के रामुत्पन्न होने पर व्याघ्रचर्म पर स्थित होकर तिलों के द्वारा दश सहस्र आहुतियाँ देवे । इस होम के करने से भूत आदि सब भाग जाया करते है और उस दिशा की ओर भय से देखते भी नहीं हैं ।८६-८७। मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी से आरम्भ करके जब तक चतुर्दशी होवे तीनों मधुरों में लोलित करके तण्डुलों से मिश्रित तेलों से हवन करे और प्रतिदिन तीन सहस्र आहुतियाँ देवे तथा संस्कार किये हुये अग्नि में ही होम करना चाहिये । वटुकेश्वर का