शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४३२ ] [ श्रीशारदा तिलक साथ बलि देवे । इसका यह प्रभाव होता है कि मन्त्रधारी पुरुष अपने काम्य कर्मों का साधन कर लिया करता है और यथोक्त सिद्धि की प्राप्ति कर लिया करता है ।७८। शाली अन्न - पलल - घृत लाजाओं का चूर्ण -- शक्कर -- गुण - ईख का रस और पूजा-इन सबको मधु में अक्त करके परिमिश्रित करके कवल बनावे और पूर्व में कथित मार्ग से देव का समाराधन करके रदत चन्दन पुष्प आदि के द्वारा रात्रि में उन के लिए बलि का आहरण करना चाहिए ।७६-८०। ततः सिध्यन्ति कार्याणि बलिनानेन मन्त्रिणः । जुहुयात्सर्पिषा मन्त्री यथोक्तां सिद्धिमाप्नुयात् ।८१ वश्याय जुहुयादिक्षुशनलैर्वशयेज्जनान् । जुहुयात्पुत्रलाभाय प्रफुल्लैः कैरवैः सुधीः ।८२ धनधान्यादिसम्पत्त्ये जुहुयादिलतण्डलैः । विल्वप्रसूनैर्जुहुयान्महतीं बिन्दति श्रियम् ।८३ लोणैर्मधुरसम्मिश्रैर्वशपद्वनिताजनान् । वृष्टिकामेन होतव्यं वेतसानां (सस्य) समिद्वरैः ।८४ अन्नेन जुहुयान्नित्यं धनधान्यादिसम्पदे । वश्याय जुहुयान्मन्त्री मधुना दिवसत्रतम् ।८५ इसके उपरान्त मन्त्रधारी के इस बलि के करने से समस्त कार्य सिद्ध हो जाते हैं । मन्त्रधारी घृत से होम करे तो यथोक्त सिद्धि को प्राप्त कर लिया करता है ।८१। वश्य के लिए ईख के खण्डों से होम करे तो वह सभी मनुष्यों को अपने वंश में कर लिया करता है। सुधी पुरुष को पुत्र के लाभ के लिए खिले हुए कैरव के पुष्पों से होम करना चाहिए ।८२। धनधान्य आदि की सम्पदा के प्राप्त होने के लिए तण्डुलों से होम करना चाहिए। यदि विल्व वृक्ष के पुष्पों से हवन करे तो बहुत बड़ी श्री का लाभ मनुष्य किया करता है ।८३। मधुर से सम्मिश्रित लवणों से यदि होम करे तो वनिताजनों को अपने वश में कर लिया करता है । यदि वृष्टि कराने की कामना हो तो