शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअष्टादश पटल ] [ ४३१ वैष्णवीके पुत्र का सौम्य दिशा में और कौमारी पुत्र का वायव्य में यजन करे। इसके उपरान्त इन्द्राणी के पुत्र का पश्चिम दिशा में पूजन करना चाहिये ।७१। राक्षस दिशा में पीछे महालक्ष्मीके पुत्र का समर्चन करे। याक्ष्य दिशा में वाराही के पुत्र का तथा आनिल दिशा में सुत का यजन करना चाहिये ।७२। वटुकों का दशों दिशाओं में अर्चन करे। धेनुक-त्रिपुरान्तकवेताल वह्नि जिह्वाख्य, कालान्त, करालक पाद, भीम- दष्ट्र, अचल, हाटकेश्वर का दिशा, विदिशाओं के अन्तरालों में यजन करे ओर फिर श्रीकण्ठ आद का अर्चन करे। इनके बाहिरी भाग में क्रोधीश्वर से आदि भृगु के अन्त तक का समर्चन करना चाहिये । ७४-७५ । इस के अनन्तर सुधी पुरुष दक्षिण में तीन नकुलीशाद्यो का पूजन करे । ७५ । दिव्यन्तरिक्षभूमिष्ठान्यो गीशान् शक्तिसंयुतान् । योगिनीभिः सहाभ्यर्च्यदीशाग्निन्र्ऋतिस्थितान् ।७६ इति सम्पूज्योद्देव वटुकं प्रोक्तवर्त्मना । धर्मार्थकाममोक्षाणां पतिर्भवति मानवः ।७७ विघ्नदुर्गा समाराध्य बलिं दत्वा विधानतः । काम्यामि साधयेन्मन्त्रा यथोक्तां सिद्धिमाप्नुयात् ।७८ शाल्यन्नं पलहं सर्पिर्लाजाचूर्णानि शर्करा । गुडमिक्षु०रसापूपर्मध्वक्तैः परिमिश्रितैः ।७९ कृत्वा कवलमाराध्य देवं प्रागुक्तवर्त्मना । रक्तचन्दनपुष्पाद्यैनिशि तस्मै बलिं हरेत् ।८० ईशान-निऋ'ति, अग्नि दिशाओं में स्थित दिविलोक ओर भूमि में स्थित शक्ति से समन्वित योगीशों का योगिनियों के ही साथ में अभ्यर्चन करना चाहिये ।७६। इस प्रकार से कथित मार्ग के द्वारा वटुक देव का पूजन करे । इसके प्रभाव से मानव धर्म--अर्थ--काम-- और मोक्ष का स्वामी हो जाता है। अर्थात् ये सभी उसे आसानीसे प्राप्त हो जाते हैं ।७७। विघ्न दुर्गा का समाराधन करके विधान के