शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४० ] [ श्री शारदा तिलक ।८३। भ्योद्वय हृदय में-शीर्ष में वषट् और मध्य में वौषट् होवे वह मन्त्र भेदित होता है। सूरियों के द्वारा वह मन्त्र सिद्धियों में सर्वदा त्याग करने के योग्य होता है ।८४। जो तीन वर्णों से युक्त और हंस से हीन होता है वह मन्त्र सुषुप्त कहा गया है। मन्त्र हो अथवा विद्या हो सत्रह अक्षरों वाला हो ।८५। फट्कारञ्चकादिर्यो मदोन्मत्तः उदीरि (उदाहृ) तः । तद्वदस्त्वं स्थितं मध्ये यस्य, मन्त्रः स मूर्च्छितः ।८६ विरामस्थानगं यस्य हतवीर्य्यः स कथ्यते । आदौ मध्ये तथा मूर्द्धिन चतुरस्त्रयतो मनुः ।८७ ज्ञातव्यो हीन इत्येषु यः स्यादष्टादशाक्षरः । एकोनविंशत्वर्णो वा यो मनुस्तारसंयुतः ।८८ हल्लेखाङकुशबीजाद्य स्तत्प्रध्वस्तं प्रचक्षते । सप्तवर्णो मनुर्बालः कुमारोऽष्टाक्षरस्तु यः (स्मृतः) ।८६ षोडशार्णो युवा, प्रोक्तश्च वारिंशल्लिपर्मनुः । त्रिशवर्णश्चतृष्पष्टिवर्णी मन्त्रः शताक्षरः ।६० जिसके आदि में फट्कार पञ्चक होवे वह मन्त्र मन्दोमत्त कहा गया है। उसी भाँति जिसके मध्य में अस्त स्थित होवे वह मन्त्र मूर्च्छित कहा गया है ।८६। जिसके विराम के स्थानमें गत हो वह मन्त्र हतवीर्य्यक कहा जाता है। आदि में-मध्य में और मूर्धा में जो चतुः- अस्त्रों से युक्त होवे वह मन्त्र हीन जानना चाहिए। जो अठारह अक्षरों वाला होता है-अथवा जो मन्त्र उन्नीस अक्षरों वाला होवे और तार से अर्थात् प्रणव से समन्वित होवे, जिसके आदि में रहने वाले हृल्लेखा- अंकुश और बीज होवे उस मन्त्र को प्रध्वस्त कहा जाता है। सात वर्णों वाला मन्त्र बाल होता है। आठ अक्षरों वाला मन्त्र कुमार कहा गया है। सोलह वर्णों वाला युवा होता है तथा अड़तालीस का मन्त्र प्रौढ़ दुरता है। तीस वर्णों वाला चौसठ वर्णों वाला शताक्षर मन्त्र- वृद्ध होता है ।८७-६०।