शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 452, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें४५२ ] [ श्रीशारदा तिलक अर्थात् कफन पर श्मशान में लिखे तो यह शत्रु का एक बहुत ही अद्भुत उच्चाटन करने वाला होता है ॥१२॥ यह सात अक्षरों का मन्त्र होता है। दो बार 'ठ' लिखकर अन्तमें स्वाहा लिखना चाहिये। मध्यमें षट्कोणों में सात वर्णों को लिखे। यहाँ यम देवता है ॥१३॥ यह मन्त्र महाभूत और पिशाचों का नाशक है। अब षट्कर्णों में एक विद्वेषण कर्म भी होता है। उसके लिये मकार कोष्ठ युगल में कोणों में साध्य साधक कर्म रूप नाम लिखे। एक स्थान में साध्य का नाम और दूसरे स्थान में साधक का नाम लिखना चाहिये। मन्त्रज्ञ-इससे ड़णाञ्प को संमण्डत्व कहा गया है। आठ दलों वाला कमल लिखकर उसकी कर्णिकामें मकार लिये और उसके दलों में धूमावती के अक्षरों को लिखे। उसके ऊपर घुं-धुं आदि की आवृत्ति करे। बाहर ओर वायुगृह लिखे। जिन द्वेषियो का विद्वेषण करना हो उनका अमुक-अमुक साध्य नाम लिखे फिर प्रान्त में परेत भूमि में उसको विहित कर देवे तो निश्चित रूपसे विद्वे- षण होता है। पूर्व में घुर्तुं युग्म ओर फिर मर्क्कटिक युग्म घोर विद्वेष करने वाली और विद्वेषी के उद्वेग करने वाली है ॥१४॥ पूर्वं घुर्घु टिके युग्मं ततोमर्कटिक यु गम् । घोरे विद्वेषकारिणि विद्वेषोद्वेगकारिणि । १५ अथ घोराघोरयोः स्यादमुकासुकयोस्ततः । विद्वेषयद्वयं हुं फट् विद्या घुर्घु टिकेरिता । १६ प्राक्प्रत्यग् दक्षिणोदग्विधिवदभिलिखेत् स्पष्टरेखाचतुष्कम् । कोणोद्यच्छूलयुक्तं वलययुगयुतं मध्यपूर्वं तदन्त्यम् । मन्त्रस्यार्णान् परस्तात् वसुपदविवरेष्वष्टवर्णांल्लिखित्वा । शूलोद्यत् द्वादशार्णं विधिवदभिहितं प्रेतराजस्य यन्त्रम्। १७ यमराजसदौमेययमेदोरुणयोदय । यदि योनिरपक्षेय चक्रिरामय । उक्तो धूमान्धकाराय स्वाहेत्यष्टाक्षरोमनुः ॥१८