शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४२ ] [ श्रीशारदा तिलक एकादशाक्षरो वाऽपि पञ्चविंशतिवर्णकः । त्रयोविंशतिवर्णो वा मन्त्रो दृप्त उदाहृतः ।६६ षड्विंशत्यक्षरो मन्त्रः षट्त्रिंशद्वर्णक स्तथा । त्रिंशदेकोनवर्णो याऽप्यङ्गहीनोऽभिधीयते । अष्टाविंशत्यक्षरो वा एक त्रिंशदथापि वा ।१०० अथवा सार्ध द्वादश वर्णो वाला मन्त्र धूमित हुआ करता है वह निन्दित होता है । अर्ध बीज त्रयस्के सहित और उसी भाँति इक्कीस वर्णों वाला बीज वर्णों का तथा तीस वर्णों का जो मन्त्र होता हैं वह मन्त्र आलिङ्गित होता है । बाईस अक्षरों वाला मन्त्र मोहित कहा गया है । जो चौबीस वर्णों का ही और सत्ताईश वर्णों का मन्त्र ही उसे क्षुधार्त समझना चाहिए । चौबीस वर्णों वाला-ग्यारह अक्षरों वाला अथवा पच्चीस वर्णों का या तेईस वर्णों का मन्त्र होवे वह मन्त्र दृप्त कहा गया है ।६६-६६। छब्बीस अक्षरों वाला मन्त्र तथा छत्तीस वर्णों वाला मन्त्र अथवा उनतीस अक्षरों वाला मन्त्र अङ्गहीन कहा जाता है । अट्ठाईस अक्षरों का अथवा इकतीस वर्णों का मन्त्र होवे ।१००। अतिक्रुुद्धः स कथितो निन्दितः सर्वकर्मसु । त्रिंशदक्षरो मन्त्रा स्त्रयस्त्रिंशदथापि ।१०१ अतिक्रूरः स कथितो निन्दितः सर्वकर्मसु । चत्वारिंशन्मारभ्य त्रिषष्टियर्विदापयेत् । १०२ तावत्संख्यां निगदिता मन्त्राः सब्रीडसज्ञकाः । पञ्चषष्ठ्यक्षरा ये स्युर्मन्त्रांस्ते शान्तमानसाः ।१०३ एकोनशतपर्यन्त पञ्चषष्ठ्यक्षरादितः । ये मन्त्रास्ते निगदिता स्थानभ्रष्टाह्वया बुधैः ।१०४ त्रयोदशाक्षरा ये स्युर्मन्त्राः पञ्चदशाक्षराः । विकलास्तेऽभिधीयन्ते शतं सार्द्धं शतं तु वा (तथा) ।१०५ ऐसा मन्त्र अति क्रुद्र कहा गया है जो सभी कर्मों में निन्दित माना गया है । तीस वर्णों वाला तथा तैंतीस वर्णों का मंत्र अति क्रुद्र कहा