भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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पृष्ठ 474

४७४ ] [ श्रीशारदा तिलक अत्यायताक्षमभिजातललाटपट्टं मग्दस्मितेन दरफुल्लकपोलरेखम् । विम्बाधरं वदनमुन्नतदीर्घनास यस्ते स्मरत्यसकृदेव स एव जातः ।१०८ आविस्तुषारकरलेखमनल्पगन्ध पुष्पोपरिभ्रमदलिब्रजनिविशेषम् । यश्चेतसा कलयते तव केशपाशं तस्य स्वयं पलति देवि ! पुराणपाशः ।१०६ श्रुतिसुचरितपाकं धोमतां स्तोत्रमेतत् पठति य इह मर्त्योनित्यमार्द्रान्तरात्मा । स भवति पदमुच्चैः संपदां पादनम्रम्रक्षिति- पमुकुटलक्ष्मीलक्षणनां चिराय ।११० हे देवि ! हरके नेत्रकी अग्नि से डरे हुए स्मर के सखा नूतन यौवन ावण्य भरित अप्रधृष्य पल्लवल को दत्त की भाँति अपादित करके आपकी नाभि कभी भी विस्मृत नहीं होती है ।१०४। भसित ईशोप गृह का पिशुन (सूचक) काश्मीर के कर्दम मनुस्तव आपके पकज स्नान करके उत्थित करोंके क्षण भर लब्ध फेनों वाले मदयुक्त हस्तीके सिन्दू- रित कुम्भोंका स्मरण कराते हैं ।१०५। मकरध्वजके शत्रु भगवान शिव की दोनों भुजायें कण्ठ से अतिरिक्त बहते हुए उज्ज्वल कान्ति की धारा से शोभित है । हे माता ! कण्ठ ग्रह के लिये रचित दीर्घ पाश मेरी स्मृति के मार्ग का विलंघन न करे ।१०५। हे गिरिराज कन्ये ! न अत्या यत और रुचिर कम्बु के विलास चुराने वाला तथा अनेक प्रकार के भूषणों के भारसे विराज मान एवं मनोहर गुणसे युक्त कण्ठ का संचि- न्तन करके मैं कभी भी तृप्ति को प्राप्त नहीं हूँ ।१०७। विशाल नेत्रों से युक्त ऐसे अभिजात ललाट यह जो मन्द स्मित से फुल्ल कपोल रेखाओं वाला है । बिम्ब फलके समान अधरोंसे युक्त-उन्नत ओर दीर्घ नासिका वाला मुख है । ऐसे मुख का जो स्मरण करता है वही वास्तव में संसार