भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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विंश पटल ] [ ४७५ में समुत्पन्न हुआ है अर्थात् उसी का जन्म धारण करना सफल होता है । १०७। हे देवि ! आविस्तुषार कर लेखा वाले - अत्यधिक गन्ध से युक्त पुष्पोंके ऊपर भ्रमण करते हुए भौरों के समूहसे संयुक्त ऐसे आपके केशपाश का जो दर्शन किया करता है उसका पुराण पाश स्वयं विनष्ट हो जाया करताहै । १०८। श्रुति सुचरित पाक युक्त मत्याँनित्य धीमानों के इस स्तोत्र को जो आर्द्रान्तरात्मा इस संसार में पाठ किया करता है वह पाठ् नम्र क्षितियों के मुकुट लक्ष्मी के लक्षण वाले सम्पदाओं के उच्च पद को चिरकाल तक प्राप्त किया करता है ।११०।

विंश पटल ॥ योग प्रकरण ॥ अथ योगं प्रवक्ष्यामि साङ्गं संवित्प्रदायकम् । ऐक्यं जीवात्मनोराहुर्यागं योगविशारदाः ।१ जीवत्मनोरभेदेन प्रतिपत्ति परे विदुः । शिवशक्त्यात्मकं ज्ञानं जगुरागमवेदिनः ।२ पुराणपुरुषस्यान्ये ज्ञानमाहुर्विशारदाः । जित्वाऽऽदावात्मनः शत्रून्कामीन्द्योगमभ्यसेत् ।३ कामक्रोधौ लोभमोहौ तत्परं मदमत्सरी । आहुर्दुःखदानेतानरिषड्वर्ग मात्मनः ॥४ योगाष्टाङ्गैरिमञ्जित्वा योगिनोयामाप्नुयुः । यमनियमावासनप्राणायामौ ततः परम् ।५ प्रत्याहारं धारणाख्यं ध्यान सार्द्धं समाधिना । अष्टाङ्गायाहुरेतानि योगिनो योगसाधने ।६