शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 498, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें४६८ ] [ श्रीशारदा तिलक तत्वसंख्यासहस्राणि मन्त्रविज्जुहुयात्तिलैः । सर्वपापविनिर्मुक्तो दीर्घमायुः स विन्दति ।२६ आयुषे साज्यहविषा केवलेनाथसर्पिषा । दुर्वात्रिकैस्तिलैर्मन्त्री जुहुयात्रिसहस्रकम् ॥३० अरुणाब्जैस्त्रिमध्वक्तैर्जुहुयादयुतं ततः । महालक्ष्मीर्भवेत्तस्य षण्मासान्नात्र संशयः ॥३१ ब्रह्मश्रियै प्रजुहुयात्प्रसूनैर्ब्राह्मवृक्षजैः । बहुना किमिहोक्तेन यथावत्साधु साधिता ॥३२ द्विजन्मनामियं विद्या सिद्धा कामदुधा मता ॥३३ ओं जातवेदसे सुनवास सोममरातीयतोनिदहाति वेदः । सनः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुन्दुरितात्यग्निः ॥३४ आग्नेयमभिधास्यामि मन्त्रं सर्वार्थसाधकम् । मारीचः काश्यपः प्रोक्तो मुनिरस्य महामनोः ॥३५ त्रिष्टुप् छन्दो देवताऽस्य जातवेदोऽग्निरीरितः । नवभिः सप्तभिः षडभिः सप्तभि पुनरष्टभिः ॥६५ मन्त्र के ज्ञान रखने वाले पुरुष को चाहिये कि चौबीस सहस्र तिलों के द्वारा आहुतियाँ देवे । वह फिर सभी पापों से विमुक्त (छूटा हुआ) होकर दीर्घ आयु की प्राप्ति किया करता है ।२६। आयु के लिये घृत के सहित हवि से होम करे अथवा केवल घृत से ही हवन करना चाहिये । दूर्वात्रिको से, तिलों के द्वारा मन्त्रधारी को तीन सहस्र आहु- तियाँ देनी चाहिये ।३०। इसके उपरान्त अरुण वर्ण के कमलों से जो मधु से अक्त होवे दश सहस्र आहुतियाँ देवें । इस प्रकार से होम करने वाले पुरुष के गृह में महालक्ष्मी हो जाया करती हैं-इसमें तनिक भी