शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary
शार्ङ्गधराचार्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished356 पृष्ठ
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220 शार्ङ्गधरसंहिता [उत्तरखण्डे
इति श्रीदामोदरसूनुना शार्ङ्गधरेण विरचितायां | वक्तव्य-स्वेद-विधि की विशेष जानकारी के लिये शार्ङ्गधरसंहितायां उत्तरखण्डे स्वेदविधिः नाम | देखें-च० सू० अ० 14 तथा सु० चि० अ० 32 । द्वितीयोऽध्यायः ।। २ ।। | उष्ण जल से स्नान की विधि-अधःकाय (गरदन के भली-भाँति स्वेदन हो जाने पर शरीर को धीरे-धीरे | नीचे का भाग) का उष्ण जल द्वारा परिषेचन या स्नान मर्दन करें और उष्ण जल से स्नान करवा दें, तत्पश्चात् ऐसा | बलवर्द्धक होता है, किन्तु उसी उष्ण जल द्वारा उत्तमांग या भोजन करायें जो अभिष्यन्दी न हो और व्यायाम (किसी भी | शिर का परिषेचन केश तथा नेत्रों के बल को हरता है। प्रकार का परिश्रम) न करने दें। |
इस प्रकार वैद्यरत्न पण्डित तारादत्त त्रिपाठी के पुत्र डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी विरचित दीपिका-व्याख्या विशेष वक्तव्य आदि से संवलित शार्ङ्गधरसंहिता उत्तरखण्ड का दूसरा अध्याय समाप्त ।। २ ।। CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA