भारतकोश
शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary

शार्ङ्गधराचार्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished356 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 356 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 29

(xxv) स्नेहपान के अयोग्य रोगी 214 | वमन के योग्य रोग 221 स्नेहपान के योग्य रोगी 214 | वमन के अयोग्य रोग 221 स्निग्ध तथा रूक्ष के लक्षण 214 | वमन के अयोग्य रोगी 221 अतिस्निग्ध के लक्षण 214 | वमन के अयोग्यों को भी वमन का विधान 222 रूक्ष तथा अतिस्निग्ध का उपचार 215 | सुकुमार आदि के वमन की विधि 222 रूक्षण द्रव्य 215 | वमन का विशेष विधान 222 स्नेह-सेवन का फल 215 | वमन के सहायक द्रव्य 222 स्नेह-सेवन में त्याज्य 215 | वमन-विरेचन-स्वरूप 222 द्वितीयोऽध्यायः | वमन-द्रव्यों का परिमाण 222 स्वेद की संख्या और गुण 216 | क्वाथ-पान की मात्रा 222 स्वेद के भेद तथा प्रयोग 216 | कल्कादि की मात्रा 222 दोष भेद से स्वेद के भेद 216 | वमन के वेग 222 पूर्व स्वेदनीय रोगी 216 | वमनादि में प्रस्थ का मान 222 पश्चात् स्वेदनीय रोगी 216 | दोष-भेद से द्रव्य-भेद 222 उभयविध स्वेदनीय रोगी 217 | पित्त में वमन 223 स्वेद की व्यवस्था 217 | कफवातज रोगों में वमन 223 स्वेद का फल 217 | वमन के उपद्रवों की चिकित्सा 223 स्वेदन-काल में रोगी की रक्षा 217 | वमन करते समय कर्तव्य 223 स्वेद के अयोग्य रोगी 217 | दुर्दान्त के लक्षण 223 मृदुस्वेद के स्थान 217 | अतिवान्त के लक्षण 223 अतिस्वेद के उपद्रव 217 | वमन के उपद्रवों की चिकित्सा 223 तापस्वेद-विधि 218 | सम्यग् वात के लक्षण 224 ऊष्मस्वेद-विधि 218 | वान्त का पथ्य 224 उपनाह-स्वेद-विधि 218 | वमन के लाभ 224 द्रवस्वेद-विधि 219 | वमन में परिहार्य 224 द्रवद्रव्य का परिमाण 219 | वमन-विरेचन के पूर्व स्नेहन-स्वेदन 224 स्नेहकृत स्वेद का काल 219 | चतुर्थोऽध्यायः स्वेद का लाभ-प्रकार 219 | विरेचन-योग्य रोगी 225 स्वेद से धातुवृद्धि 219 | वमन-रहित विरेचन के दोष 225 स्वेदन की अवधि 219 | विरेचन का काल 225 सुस्विन्न का आहार-विहार 219 | संशोधन का फल 225 उष्ण जल से स्नान-विधि 220 | विरेचन-योग्य रोग 225 तृतीयोऽध्यायः | विरेचन के अयोग्य रोगी 225 वमन-विरेचन का काल 221 | विरेचन-योग्य रोगी 226 वमन के योग्य पुरुष 221 | विरेचन के लिए कोष्ठ-भेद 226 | कोष्ठ-भेद से मात्रा-विचार 226