शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary
शार्ङ्गधराचार्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 30, कुल 356 में से
संदर्भ में पढ़ें(xxvi)
कोष्ठ-भेद से द्रव्यों का विचार 226 | अनुवासन-वस्ति के द्रव्य 232 वेग-भेद से विरेचन-मात्रा 226 | विरेचन के पश्चात् वस्ति 232 विरेचन-द्रव्यों का मान-विचार 226 | वस्ति देने की विधि 232 दोष-भेद से द्रव्य-विधान 226 | वस्ति-प्रयोग में काल-निर्देश 233 एरण्ड तैल-प्रयोग 227 | मात्रा-काल-प्रमाण 233 सब ऋतुओं के योग्य विरेचन 227 | वस्ति-प्रयोग में पश्चात् कर्म 233 अभयादि मोदक 227 | सम्यक् अनुवासित के लक्षण 233 विरेचन-काल में कर्तव्य 228 | वस्ति के पश्चात् पथ्य 233 सम्यग् विरेचन का लक्षण 228 | अनुवासन की व्यापत्ति की चिकित्सा 233 दुर्विरिक्त का लक्षण 228 | उष्णोदक के गुण 233 दुर्विरिक्त की चिकित्सा 228 | धान्यशुण्ठी जल का गुण 233 अति विरेचन के उपद्रव 228 | स्नेह वस्ति के साथ निरूहण-वस्ति 233 विरेकातियोग में कर्तव्य 228 | वस्तियों के फल 233 सुविरिक्त के लक्षण 228 | वातरोगी के लिए स्नेह-वस्ति 234 विरेचन से लाभ 229 | स्नेह तथा निरूहवस्ति की प्रशंसा 234 विरेचन में परिहार्य 229 | स्नेह-वस्ति के निकलने पर 234 विरेचन में पथ्य 229 | स्नेह-वस्ति के उपद्रव और प्रतिकार 234 | उपद्रवहीन स्नेह-वस्ति 234 पञ्चमोऽध्यायः | स्नेह के न लौटने पर उपाय 235 वस्तियों के दो भेद 230 | स्नेह-वस्ति के लिए गुडूच्यादि तैल 235 वस्तियों के लक्षण 230 | स्नेहपानादि उपचार 235 वस्ति-क्रम का निर्देश 230 | धान्यशुण्ठी क्वाथ 235 अनुवासन का भेद मात्रावस्ति 230 | वस्ति-फलश्रुति 235 अनुवासन के योग्य रोगी 231 | वस्ति-सेवनक्रम 235 अनुवासन के अयोग्य रोगी 231 | वस्ति-व्यापत्तियाँ 235 वस्ति-नेत्र के द्रव्य 231 | पथ्यापथ्य-निर्देश 235 वयस्-भेद से नेत्र-परिमाण 231 | वस्ति-नेत्र का छिद्र तथा आकार 231 | षष्ठोऽध्यायः वस्ति-नेत्र का परिणाह 231 | निरूहण-वस्ति-परिचय 237 वस्ति-नेत्र की कर्णिका 231 | निरूहण-वस्ति की मात्रा 237 वस्ति के योग्य द्रव्य 231 | निरूहण के अयोग्य रोगी 237 व्रणवस्ति का नेत्र 231 | निरूहण-वस्ति के योग्य रोगी 237 वस्ति के सम्यग्योग का फल 232 | निरूहण की विधि 237 वस्ति के लिए समय-निर्देश 232 | सुनिरूढ के लक्षण 238 वस्ति के पूर्व भोजन-निर्देश 232 | दुर्निरूढ के लक्षण 238 वस्ति की मात्रा के दोष 232 | अतिनिरूढ के लक्षण 238 वस्ति-मात्रा-निर्देश 232 | आस्थापन तथा निरूहण का प्रयोग 238