शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary
शार्ङ्गधराचार्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 340, कुल 356 में से
संदर्भ में पढ़ें304 | शार्ङ्गधरसंहिता पटोलादिगण क्वाथ ९२ | पिप्पल्यादि क्वाथ ९३ | ( तृतीयक ज्वर रोग ) धान्यनागर क्वाथ ९५ | सप्तमुष्टिक यूष १०४ | गुडूच्यादि क्वाथ ९१, ९५, ९६ ( वातज ज्वर रोग ) | सञ्जीवनी बटी १३२ | पानीयकल्याणक घृत १४८ गुडूच्यादि क्वाथ ९१, ९५, ९६ | सूचिकाभरण रस १९७ | ( ज्वरातिसार रोग ) शालपर्ण्यादि क्वाथ ९१, ९६ | जलबन्धु रस १९७ | बृहद्गुडूच्यादि क्वाथ ९५ काश्मर्यादि क्वाथ ९१ | पञ्चवक्त्र रस १९७ | नागरादि क्वाथ ९५, ९८ लोकनाथ रस १९२ | उन्मत्त रस १९८ | ४६. तृष्णा रोग ( पित्तज ज्वर रोग ) | सन्निपाताञ्जन १९८ | गुडूच्यादिगण क्वाथ ९१ कट्फलादि क्वाथ ९४ | अवपीड नस्य २४६ | षडंग-पानीय १०५ पर्पटादि क्वाथ ९१ | विरेचन नस्य २४५ | लाजमण्ड १०७ द्राक्षादि क्वाथ ९१ | प्रबोधाञ्जन २८६ | बृहत् मधूकपुष्पादि फाण्ट १०८ पटोलादिगण क्वाथ ९२ | ( जीर्णज्वर रोग ) | आम्रादि फाण्ट १०८ लोकनाथ रस १९२ | गुडूच्यादि क्वाथ ९१, ९५, ९६ | यवसक्तु मन्थ १०९ ( कफज ज्वर रोग ) | पञ्चमूलपक्व-क्षीर १०५ | मरिचादि हिम ११० बीजपूरादि क्वाथ ९२ | अमृता हिम ११० | धान्यक हिम ११० भूनिम्बादि क्वाथ ९२ | विरेचन २२५-२२९ | धान्यकादि हिम ११० पटोलादिगण क्वाथ ९२ | ( विषमज्वर रोग ) | जीवनीयगण चूर्ण ११८ पञ्चमूलपक्व-क्षीर १०५ | तुलसी आदि का स्वरस ८६ | आमलक्यादि गुटिका १३१ क्षीरपाक-विधि १०५ | क्षुद्रादि क्वाथ ९४ | च्यवनप्राशावलेह १४० लोकनाथ रस १९२ | मुस्तादि क्वाथ ९४ | कूष्माण्डावलेह १४१ ( वातपित्तज्वर रोग ) | पटोलादि क्वाथ ९२, ९४, ९५, १०१, १०२ | निरूहण का प्रयोग २३८ पञ्चभद्र क्वाथ ९२ | रसोन कल्क ११२ | प्रतिमर्श नस्य २४७-२४८ बृहत् मधूकपुष्पादि फाण्ट १०८ | त्रिफलापिप्पली चूर्ण १२० | मधु गण्डूष २५६ नीलोत्पलादि हिम ११० | ( धातुगत ज्वर रोग ) | ४७. दाह रोग ( वातकफज्वर रोग ) | पिप्पली-मोदक १३३ | गुडूच्यादिगण क्वाथ ९१ क्षुद्रादि क्वाथ ९४ | पिप्पल्यादि घृत १४६ | हरीतक्यादि क्वाथ ९८ शालपर्ण्यादि क्वाथ ९१, ९६ | महापञ्चतिक्त घृत १४८ | न्यग्रोधादि क्वाथ ९९ आरग्वधादि क्वाथ ९२ | लाक्षादि तैल १५२ | बृहत् मधूकपुष्पादि फाण्ट १०८ पिप्पल्यादि क्वाथ ९३ | ज्वरारि रस १९१ | यवसक्तु मन्थ १०९ हिंग्वादि चूर्ण १२६ | ज्वरांकुश रस १९१ | ( अन्तर्दाह रोग ) ( पित्तकफज्वर रोग ) | अभयादि मोदक २२७ | धान्यक हिम ११० अमृताष्टक क्वाथ ९२ | निरूहण का प्रयोग २३८ | धान्यकादि हिम ११० पटोलादिगण क्वाथ ९२ | अवपीड नस्य २४६ | जीवनीयगण चूर्ण ११८ वासादि क्वाथ ९६, १०२ | ( शीतज्वर रोग ) | ( हस्तपादांगदाह रोग ) ( सन्निपातज ज्वर रोग ) | क्षुद्रादि क्वाथ ९४ | सितोपलादि चूर्ण १२७ क्षुद्रादि क्वाथ ९४ | शीतारि रस १९१ | ( उरोदाह रोग ) अभयादि क्वाथ ९३ | ( एकाहिक ज्वर रोग ) | कामदेव घृत १४७ शालपर्ण्यादि क्वाथ ९१, ९६ | पटोलादि क्वाथ ९२, ९४, १०१, १०२ | अभयादि मोदक २२७ पटोलादिगण क्वाथ ९२ | मधु गण्डूष २५६