शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary
शार्ङ्गधराचार्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished356 पृष्ठ
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रोगपरक-सूची ३०५
| रक्त निर्हरण | २७२ | ( प्रतिश्याय रोग ) | पिण्डी के योग | २८० | |
| ४८. द्विजिव्हक रोग | आर्द्रक स्वरस | ८६ | विडालक योग | २८० | |
| वमन | २२१-२२४ | विभीतक पुटपाक | ८८ | ( पित्तज अभिष्यन्द रोग ) | |
| ४९. धातुक्षय रोग | जातीफलादि चूर्ण | १२२ | आश्योतन योग | २७९ | |
| पिप्पली मोदक | १३३ | बाहुशाल गुड़ | १३० | पिण्डी के योग | २८० |
| ( शुक्रक्षय, ओजःक्षय रोग ) | व्योषादि बटी | १३२ | ( कफज अभिष्यन्द रोग ) | ||
| कामदेव घृत | १४७ | पानीयकल्याणक घृत | १४८ | शिरोवस्ति विधि | २६८ |
| ( नष्टशुक्र रोग ) | लाक्षादि तैल | १५२ | पिण्डी के योग | २८० | |
| नारायण तैल | १५३ | विरेचन नस्य | २४५ | ( रक्ताभिष्यन्द रोग ) | |
| दशमूलारिष्ट | १७१ | ( नासा-रक्तस्राव रोग ) | रक्त निर्हरण | २७२ | |
| ५०. नासा रोग | लोकनाथ रस | १९२ | नेत्रसिञ्चन | २८८ | |
| मयूर घृत | १५१ | रक्त निर्हरण | २७२ | आश्योतन योग | २७९ |
| विरेचन | २२५-२२९ | ५१. नेत्र रोग | पिण्डी के योग | २८० | |
| विरेचन नस्य | २४५ | मंजिष्ठादि क्वाथ | १०२ | ( अश्रुरोग ) | |
| बृंहण नस्य | २४७ | अमृतादि क्वाथ | १०१, १०३ | दार्व्यादि रसक्रिया | २८६ |
| ( नासार्शो रोग ) | त्रिफला चूर्ण | ११७ | ( अंजननामिका रोग ) | ||
| गृहधूम तैल | १६० | चन्द्रप्रभा बटी | १३३ | चूर्णाञ्जन (लेखन) | २८७ |
| ( क्षवथु-छींक रोग ) | योगराज गुग्गुलु | १३५ | ( अन्धत्व रोग ) | ||
| कुष्ठादि तैल | १६० | कैशोर गुग्गुलु | १३६ | कतक रसक्रिया | २८६ |
| ( नासादाह रोग ) | त्रिफला घृत | १५० | ( अर्जुन रोग ) | ||
| रक्त निर्हरण | २७२ | मयूर घृत | १५१ | चूर्णाञ्जन (रोपण) | २८७ |
| ( नासापाक रोग ) | अभयादि मोदक | २२७ | कुसुमिका वर्ति | २८५ | |
| वमन | २२१-२२४ | विरेचन नस्य | २४५ | ( अर्म रोग ) | |
| रक्त निर्हरण | २७२ | बृंहण नस्य | २४७ | तुत्थादि रसक्रिया | २८५ |
| ( पीनस रोग ) | नेत्ररोगहर लेप (1-2) | २६२ | चूर्णाञ्जन (लेखन) | २८७ | |
| निदिग्धिकादि क्वाथ | ९४ | तर्पण-विधि | २८१ | ( नेत्रकण्डू रोग ) | |
| वासादि क्वाथ | ९६, ९७, १०२ | चन्द्रोदया वर्ति | २८४ | वटक्षीर रसाञ्जन | २८५ |
| त्र्यूषण चूर्ण | ११७ | चूर्णाञ्जन | २८७ | समुद्रफेनादि वर्ति | २८४ |
| दाडिमाष्टक चूर्ण | १२१ | प्रत्यञ्जन-विधि | २८८ | चूर्णाञ्जन (लेखन) | २८७ |
| लवंगादि चूर्ण | १२२ | नयानामृताञ्जन | २८८ | ( काच रोग ) | |
| बाहुशाल गुड़ | १३० | नेत्रप्रसादन | २८८ | तुत्थादि रसक्रिया | २८५ |
| व्योषादि बटी | १३२ | नेत्रसिञ्चन | २८८ | चूर्णाञ्जन (लेखन) | २८७ |
| अगस्त्यहरीतकी अवलेह | १४२ | ( नेत्राधिमन्थ रोग ) | गुडूची रसक्रिया | २८६ | |
| पाठादि तैल | १६० | रक्त निर्हरण | २७२ | ( क्लेद रोग ) | |
| विरेचन नस्य | २४५ | शिरो वस्ति की विधि | २६८ | पुनर्नवा रसाञ्जन | २८६ |
| ( पूतिनासा रोग ) | ( वातज अभिष्यन्द रोग ) | ( तिमिर रोग ) | |||
| व्याघ्री तैल | १६० | आश्योतन योग | २७९ | चन्द्रोदया वर्ति | २८४ |
| रक्त निर्हरण | २७२ | पिण्डिका-विधान | २८० | तुत्थादि रसक्रिया | २८५ |