भारतकोश
शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary

शार्ङ्गधराचार्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished356 पृष्ठ

पृष्ठ 68, कुल 356 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 68

32 शार्ङ्गधरसंहिता [ पूर्वखण्डे शुभ्रपुष्पाणि वासांसि मांसमत्स्यफलानि च।।३८।। प्राप्यातुरः सुखी भूयात् स्वस्थो धनमवाप्नुयात् । सपने में सफेद फूलों, सफेद कपड़ों, मांस, मछली तथा फलों को प्राप्त कर रोगी नीरोग हो जाता है और स्वस्थ मनुष्य धन को प्राप्त करता है। अगम्यागमनं लेपो विष्ठया रुदितं मृतिः।।३९।। आममांसाशनं स्वप्ने धनारोग्याप्तये विदुः । स्वप्न में जो अगम्या (माता, बहिन और पुत्री आदि) से गमन (मैथुन), पुरीष (मल) का लेप, रोना, मृत्यु तथा कच्चे मांस का भक्षण करता है तो वह धन और आरोग्य की प्राप्ति के लिए होता है। जलौका भ्रमरी सर्पो मक्षिका वापि यं दशेत् ।।४०।। रोगी स भूयादुल्लाघः स्वस्थो धनमवाप्नुयात् ।।४१।। इति श्रीदामोदरसूनुना शार्ङ्गधरेण विरचितायां शार्ङ्गधरसंहितायां पूर्वखण्डे नाडीपरीक्षादिविधिर्नाम तृतीयोऽध्यायः ।।३।। स्वप्न में जिस मनुष्य को जोंक, भौंरा, साँप और मक्खियाँ काटती हैं, वह यदि रोगी है तो स्वस्थ हो जाता है और यदि स्वस्थ है तो उसे धन की प्राप्ति होती है। इस प्रकार वैद्यरत्न पण्डित तारादत्त त्रिपाठी के पुत्र डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी विरचित दीपिका व्याख्या, विशेष वक्तव्य आदि से संवलित शार्ङ्गधरसंहिता पूर्वखण्ड का तीसरा अध्याय समाप्त ।। ३ ।। CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA