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शिशुपालवधम् (महाकवि माघ - सान्वय हिन्दी टीका सहित)

शिशुपालवधम् (महाकवि माघ - सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Shishupalavadham of Magha Hindi

महाकवि माघ द्वारा

स्रोत: Shishupalavadham with Sanskrit Shlokas & Hindi Anvaya Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished14 पृष्ठ

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संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 5

करोति कंसादिमहीभृतां वधाज् जनो मृगाणामिव यत्तव स्तवम्। हरे! हिरण्याक्षपुरःसरासुर- द्विपद्विषः प्रत्युत सा तिरस्क्रिया ॥ ३९॥

ऐसे स्थलों पर सविभक्ति ‘वधाज्’ पादान्त पदों के कृतसन्धि अर्धाक्षर को अन्य संस्करणों की भांति अग्रिम पाद के साथ ‘वधाज्जनो’ इस प्रकार से नहीं जोड़ा गया है, बल्कि ‘वधाज्’ इस सविभक्तिक को एक साथ कर अग्रिम पाद के ‘जनो’ को नई पङ्क्ति से आरम्भ किया गया है जिससे उच्चारण में सौकर्य हो। इस प्रकार आपको हमारे संस्करण में सर्वत्र ऐसा पाठ देखने को मिलेगा।

❖ यद्यपि इस संस्करण को हमने परिशुद्धतम तैयार किया है, फिर भी मानव-स्वभावजन्य कोई त्रुटि आपको परिलक्षित हो तो हम आपके विचारों का 8899187929 इस व्हाट्सएप या इस samskritsaarah@gmail.com ई-मेल पर स्वागत करते हैं।

❖ यह ई-बुक् संस्करण है, अतः टेबलेट इत्यादि डिवाइस द्वारा इसे पढ़ने पर अच्छा अनुभव मिलेगा, अथवा आँखों की अच्छी सेहत के लिए कलर-प्रिंट लेकर पढ़ने में अच्छा अनुभव प्राप्त होगा।

❖ इस संस्करण के संस्कृत पाठ-सम्पादन संबन्धित कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रो. विजयपाल शास्त्री जी (साहित्यविभागाध्यक्ष केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथकीर्ति परिसर, देवप्रयाग) ने दिये हैं तथा इसी परिसर के हिंदी विभाग के सहायकाचार्य डॉ. वीरेन्द्र सिंह बर्त्वाल जी ने इस संस्करण में प्रयुक्त हिंदी वाक्यों को परिशुद्धता प्रदान की है, एतदर्थ हम दोनों महानुभावों के चिर कृतज्ञ रहेंगे।

❖ इस संस्करण में हमने निम्नलिखित ग्रन्थों से पाठान्तर पाठसंशोधन इत्यादि में पर्याप्त सहायता ली गई है, एतदर्थ हम इन व्याख्याकारों या सम्पादकों के सदैव ऋणी रहेंगे –

सहायकग्रन्थाः

व्याख्याकारः/ सम्पादकःप्रकाशकःसंस्करणम्वर्षम्
तारिणीशझारामनारायणलाल- विजयकुमारःप्रथमम्२०२०
जनार्दनशास्त्रीमोतीलाल-बनारसीदासःद्वितीयम्२०१२
हरगोविन्द शास्त्रीचौखम्बाविद्याभवनम्पुनर्मुद्रितम्२०१५
सी. राजेन्द्रःसाहित्य-अकादमीप्रथमम्२०१८
शिवदत्त दाधिमथःनिर्णयसागरः मुम्बईसप्तमम्१९१७
डॉ. गजाननशास्त्री मुसलगाँवकरःचौखम्बासंस्कृतभवनम् वाराणसीप्रथमम्वि०सं० २०५५