शिव गीता (पद्म पुराण - राम-शिव ज्ञान संवाद सटीक)
Shiva Gita from Padma Purana with Hindi Commentary
भगवान् शिव / महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 3, कुल 44 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रथमोऽध्यायः ॥१॥
अध्याय २ ऋषि बोले। अगस्त्यजी रामचन्द्रके निकट क्यों आये थे उर किस प्रकार से रामचन्द्रसे विरजा दीक्षा कराई थी इससे रामचंद्रको किस फलकी प्राप्ति हुई सो आप हमसे कहिये ॥१॥ सूत उवाच । सूतजी बोले जिस समय जनककुमारी सीताको रावणने हरण किया था तब रामचन्द्रने वियोगके कारण बहुत विलाप किया ॥२॥ निद्रा देहाभिमान और भोजन त्यागकर रातदिन शोक करते भाईसहित रामचन्द्रने प्राण त्याग करनेकी इच्छा की ॥३॥ अगस्त्यजी यह बात जानकर रामचंद्रजी के समीप आये और मुनिने रामचन्द्रको संसारकी असारता समझाई ॥४॥ अगस्त्य उवाच । अगस्त्यजी बोले- हे राजेन्द्र! यह क्या विषाद करते हो, स्त्री किसकी इसका विचार तो करो पृथ्वी, आप, तेज, वायु और आकाश इन पांच महाभूतों का बना हुआ यह देह जड है इसको ज्ञान नही होता ॥५॥ और आत्मा तो निर्लेप सर्वत्र परिपूर्ण सच्चिदानन्दस्वरूप है आत्मा न कभी उत्पन्न होता न मरता दुःख भोगता है ॥६॥ जिस प्रकार यह सूर्य संपूर्ण संसारके चक्षुरूप से स्थित है और चक्षुओंके दोषसे कभी लिप्त नही होता ॥७॥ इसी प्रकार सम्पूर्ण भूतों का आत्माभी दुःखमें लिप्त नही होता और यह देहभी मलका पिंड तथा जड है यह जीव कलारहित होने से जडै है ॥८॥ यह काष्ठ अग्निके संयोगसे भस्म हो जाता है, सियार आदि इसको खाजाते है, तौ भी नही जानता कि उसके वियोग में क्या दुःख होता है ॥९॥ जिसका सुवर्णके समान गौरवर्ण, अथवा दूर्वादलके समान श्याम स्वरूप है, कुचकलश जिसके उन्नत है, मध्यभाग सूक्ष्म है ॥१०॥ बडे नितम्ब और जांघोवाली चरणतल जिसका कमलके सदृश रक्तवर्ण है जिसका मुख पूर्णिमाके चन्द्रमाके समान है और पके बिम्बा फलके समान जिसके अधरोष्ठ है ॥११॥ नील कमलकी समान जिसके विशाल नेत्र है, मत्त कोकिलाकी समान जिसके वचन और मत्त हाथीकी समान जिसकी चाल है ॥१२॥ ऐसी स्त्री कामदेवकि बाणकी समान कटाक्षोंस मेरे ऊपर कृपा करती है इस प्रकारसे जो मूर्ख मानता है वही कामका शिष्य है ॥१३॥ हे राजन! सावधान होकर सुनो मैं इसका विवेक कथन करता हुं यह जीव स्त्री पुरुष या नपुंसक नही है ॥१४॥ यह देही मूर्तिरहित सब देहों में स्थित रूपरहित सर्वव्यापी सबका साक्षी देहमें स्थित हो प्राणीको सजीव करनेवाला है जिसको सूक्ष्मांगी सुकुमार बाला कहते है वह एक मलका पिंड और जडस्वरूप है ॥१५॥ वह न कुछ देखती न सुनती न सूंघती है जिसका शरीर चर्ममात्रका है हे रामचंद्र ! बुद्धिसे विचारो और छोडो ॥१६॥ जो प्राणोंसे भी अधिक प्यारी है वही सीता तुम्हारे दुःखका कारण होगी । पंच महाभूतोंसे उत्पन्न होनेके कारण पांचभौतिक देह उत्पन्न होते है ॥१७॥ परन्तु उन सबमें आत्मा एक परिपूर्ण सनातन है इस विचार से कौन स्त्री कौन पुरुष सब ही सहोदर है ॥१८॥ जिस प्रकार अनेक गृह निर्माण करनेमें आकाश अबच्छिन्नताको प्राप्त होता है अर्थात उन सबमें मिल जाता है पश्चात