शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)
Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary
गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२ शिवमहिम्नस्तोत्रम् हे नाथ ! काल से प्रेरित मृगरूप धारण किये ब्रह्मा को भय से मृगीरूपी धारण करने वाली अपनी कन्या में आसक्त देख, आपका उनके पीछे छोड़ा गया बाण आर्द्रा आज भी नक्षत्र रूप में मृगशिरा (ब्रह्मा) के पीछे वर्तमान है ॥ २२ ॥ स्वलावण्याशंसा धृतधनुषमह्नाय तृणवत् । पुरः प्लुष्टं दृष्ट्वापुरमथन पुष्पायुधमपि ॥ यदिस्त्रैणं देवो यमनिरतदेहार्ध-घटनाद् । अवैति त्वामद्धावत वरद मुग्धा युवतयः ॥२३॥ हे यम-नियम वाले त्रिपुरहर ! आपकी कृपा से आपका अर्धस्थान प्राप्त करने वाली, अपने सौन्दर्य रूपी धनुष को धारण करने वाले कामदेव को जला हुआ देखकर भी यदि पार्वती आपको अपने अधीन समझें तो ठीक ही है, क्योंकि प्रायः युवतियाँ ज्ञान-हीन होती हैं ॥ २३ ॥ स्मशानेष्वाक्रीडारमरहर पिशाचाः सहचरा- श्चिताभस्मालेपः स्रगपि नृकरोटीपरिकरः ॥ अमंगल्यं शीलं तव भवतु ना मैवमखिलम् तथापि स्मर्तॄणां वरद परमं मंगलमसि ॥ २४ ॥ हे स्मरहर ! आपका स्मशान में क्रीडा करना, भुत-प्रेत पिशा- चादि को साथ रखना, शरीर में चिता-भस्म का लेपन करना तथा