भारतकोश
शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary

गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा

DevanagariSanskritpublished35 पृष्ठ

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१४ शिवमहिम्नस्तोत्रम् बिभ्रते ।” इस श्रुति के अनुसार सूर्य, चन्द्रमा, वायु, अग्नि, जल, आकाश, पृथिवी और आत्मा भी आपही हैं, किन्तु मेरे विचार से ऐसा कोई स्थान नहीं है, जहाँ आप न हों ॥ २६ ॥ त्रयीं तिस्रो वृत्तिस्त्रिभुवनमथोत्रीनपिसुरा । नकाराद्यै वर्णैस्त्रिभिरभिदधत्तीर्णविकृतिः ॥ तुरीयं ते धाम ध्वनिभिरवरुन्धानमणुभिः । समस्तं व्यस्तं त्वां शरणद गृणात्योमिति पदम् ।२७। हे शरणद ! व्यस्त [अ, उ, म, ] 'ॐ' पद, शक्ति द्वारा तीन वेद [ऋग्, यजुः और साम], तीन वृत्ति [जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति], त्रिभुवन [भूर्भुवः स्वः] तथा तीनों देव [ब्रह्मा, विष्णु, महेश], इन प्रपञ्चों से व्यस्त आपका बोधक है और समस्त 'ॐ' पद, समुदाय शक्ति से सर्व विकार रहित अवस्थात्रयसे विलक्षण अखण्ड, चैतन्य आपको सूक्ष्म ध्वनि से व्यस्त करता है ॥ २७ ॥ भवः शर्वो रुद्रः पशुपतिरथोद्य्रः सह महां- स्तथा भीमेशानाविति यदभिधानाष्टकमिदम् ॥ अमुष्मिन्प्रत्येकं प्रविचरति देवः श्रुतिरपि । प्रियायास्मैधाम्नेप्रणिहितनमस्योऽस्मि भवते ॥२८॥ हे देव ! भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महादेव, भीम और ईशान- यह जो आपके नाम का अष्टक है, इस प्रत्येक नाम में वेद और