शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)
Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary
गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४ शिवमहिम्नस्तोत्रम् बिभ्रते ।” इस श्रुति के अनुसार सूर्य, चन्द्रमा, वायु, अग्नि, जल, आकाश, पृथिवी और आत्मा भी आपही हैं, किन्तु मेरे विचार से ऐसा कोई स्थान नहीं है, जहाँ आप न हों ॥ २६ ॥ त्रयीं तिस्रो वृत्तिस्त्रिभुवनमथोत्रीनपिसुरा । नकाराद्यै वर्णैस्त्रिभिरभिदधत्तीर्णविकृतिः ॥ तुरीयं ते धाम ध्वनिभिरवरुन्धानमणुभिः । समस्तं व्यस्तं त्वां शरणद गृणात्योमिति पदम् ।२७। हे शरणद ! व्यस्त [अ, उ, म, ] 'ॐ' पद, शक्ति द्वारा तीन वेद [ऋग्, यजुः और साम], तीन वृत्ति [जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति], त्रिभुवन [भूर्भुवः स्वः] तथा तीनों देव [ब्रह्मा, विष्णु, महेश], इन प्रपञ्चों से व्यस्त आपका बोधक है और समस्त 'ॐ' पद, समुदाय शक्ति से सर्व विकार रहित अवस्थात्रयसे विलक्षण अखण्ड, चैतन्य आपको सूक्ष्म ध्वनि से व्यस्त करता है ॥ २७ ॥ भवः शर्वो रुद्रः पशुपतिरथोद्य्रः सह महां- स्तथा भीमेशानाविति यदभिधानाष्टकमिदम् ॥ अमुष्मिन्प्रत्येकं प्रविचरति देवः श्रुतिरपि । प्रियायास्मैधाम्नेप्रणिहितनमस्योऽस्मि भवते ॥२८॥ हे देव ! भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महादेव, भीम और ईशान- यह जो आपके नाम का अष्टक है, इस प्रत्येक नाम में वेद और